Food safety : स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में जांचे गए खाद्य पदार्थों के हजारों सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसमें रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान से लेकर पेय पदार्थ और कैफीन वाले ड्रिंक्स तक शामिल हैं।
देश में मिलावटी और असुरक्षित खाने पर बड़ा खुलासा
2.23 लाख से अधिक सैंपलों की हुई जांच
संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में कुल 2,23,808 खाद्य सैंपलों की प्रयोगशालाओं में जांच की गई थी। इस गहन जांच के दौरान 40,023 सैंपल ऐसे पाए गए जो सुरक्षा और गुणवत्ता के तय पैमानों पर पूरी तरह फेल साबित हुए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में बिकने वाले सामानों की गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती जा रही है।
अदालती कार्रवाई और सजा के आंकड़े
सरकार द्वारा संसद में पेश की गई जानकारी के अनुसार, घटिया और असुरक्षित खाना बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। इस दौरान 31,878 दीवानी मामलों का निपटारा करते हुए दोषियों पर जुर्माना लगाया गया। वहीं, गंभीर मामलों में केवल 1,918 आपराधिक मामलों में सजा दर्ज की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े फिलहाल प्रोविजनल हैं और आगे की लैब रिपोर्ट और अदालती सुनवाई के बाद इनमें बदलाव हो सकता है। यह कार्रवाई सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई है।
केंद्र और राज्यों की साझी जिम्मेदारी
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाए रखने के नियम तय करने का काम भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) का है। FSSAI विज्ञान पर आधारित मानक तैयार करता है, लेकिन 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' को लागू करने और बाजार में नियम पालन कराने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त रूप से होती है।
मिलावट रोकने के लिए सरकार के कदम
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मिलावटखोरी पर लगाम लगाने के लिए FSSAI कई स्तरों पर काम कर रहा है। जनता को जागरूक करने के लिए "#No To Adulteration" और "How to Check for Adulteration" जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, दूरदराज के इलाकों में जांच के लिए 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' (FSW) नाम की मोबाइल लैब्स और 'फूड सेफ्टी मैजिक बॉक्स' उपलब्ध कराए गए हैं। आम लोग और व्यापारी आसानी से मिलावट पहचान सकें, इसके लिए 'डार्ट' (DART) बुकलेट जारी की गई है और त्वरित जांच (RAPID) किट को मंजूरी दी गई है।
नए वित्त वर्ष में भी जारी है सख्ती
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर नए वित्त वर्ष (FY 2026-27) में भी कार्रवाई जारी है। लेबलिंग और डिस्प्ले नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों (FBOs) को अब तक 15 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों पर आने वाले समय में भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
