Loan Interest Rate Cut : सरकारी सेक्टर के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए चुनिंदा खुदरा लोन पर ब्याज दरों में कटौती की घोषणा की है। बैंक ने यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल ही में नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कटौती के बाद लिया है। इस कदम से घर खरीदने, वाहन लेने और व्यक्तिगत जरुरतों के लिए कर्ज लेने वाले लोगों के लिए लोन सस्ता हो जाएगा।
यूनियन बैंक ने खुदरा कर्ज पर ब्याज दरें घटाईं, ग्राहकों को मिलेगी राहत (तस्वीर-istock)
18 दिसंबर 2025 से लागू होंगी नई दरें
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि नई ब्याज दरें 18 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी हैं। इसका मतलब है कि इस तारीख के बाद नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों को कम ब्याज दर का सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही कुछ मौजूदा ग्राहकों को भी नियमों के अनुसार राहत मिल सकती है।
होम लोन हुआ सस्ता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक बैंक ने आवास ऋण यानी होम लोन पर ब्याज दर में 0.30 प्रतिशत की कटौती की है। संशोधित दरों के तहत अब होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7.15 प्रतिशत प्रति वर्ष हो गई है। इससे पहले यह दर 7.45 प्रतिशत सालाना थी। इस कटौती से खासतौर पर मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को फायदा होगा। कम ब्याज दर होने से ईएमआई घटेगी और कुल ब्याज बोझ भी कम पड़ेगा।
वाहन कर्ज पर भी राहत
यूनियन बैंक ने वाहन कर्ज की ब्याज दरों में 0.40 प्रतिशत की कमी की है। अब वाहन कर्ज 7.50 प्रतिशत सालाना से शुरू होंगे, जबकि पहले इसकी शुरुआती दर 7.90 प्रतिशत थी। इस फैसले से दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि इससे ऑटो सेक्टर की मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है।
पर्सनल लोन पर सबसे बड़ी कटौती
व्यक्तिगत ऋण यानी पर्सनल लोन पर बैंक ने सबसे ज्यादा राहत दी है। इस पर ब्याज दर में 1.60 प्रतिशत की कटौती की गई है। अब पर्सनल लोन की शुरुआती ब्याज दर 8.75 प्रतिशत सालाना हो गई है, जबकि पहले यह 10.35 प्रतिशत प्रति वर्ष थी। पर्सनल लोन आमतौर पर शिक्षा, इलाज, शादी या अन्य निजी जरूरतों के लिए लिया जाता है। ब्याज दर घटने से ऐसे कर्ज लेना अब पहले की तुलना में ज्यादा आसान और सस्ता होगा।
ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रीन फाइनेंस’ के तहत अतिरिक्त छूट भी दे रहा है। बैंक पात्र ग्रीन फाइनेंस आवास ऋण और वाहन कर्ज पर 0.10 प्रतिशत सालाना की अतिरिक्त छूट प्रदान कर रहा है। इस पहल का मकसद ऊर्जा दक्ष घरों और इलेक्ट्रिक या पर्यावरण के अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित करना है।
आरबीआई की रेपो दर कटौती का असर
गौरतलब है कि इसी महीने भारतीय रिजर्व बैंक ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। रेपो दर वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों के लिए धन सस्ता हो जाता है, जिसका फायदा वे ग्राहकों को कम ब्याज दर के रूप में देते हैं। यूनियन बैंक का यह फैसला उसी का नतीजा माना जा रहा है।
ग्राहकों और अर्थव्यवस्था को फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती से न सिर्फ ग्राहकों को राहत मिलेगी, बल्कि कर्ज की मांग बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। आवास और वाहन जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने से रोजगार और निवेश पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
