जब भी आप बैंक में अकाउंट खुलवाने जाते हैं तो आपको एक फॉर्म दिया जाता है, उसमे आपकी डिटेल के साथ एक नॉमिनी डिटेल भी मांगी जाती है। नॉमिनी हर अकाउंट के लिए जरुरी होते हैं। अगर आपका बैंक अकाउंट है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की सुविधा, सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैंकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। अब बैंक खातों, लॉकर और सेफ कस्टडी से जुड़ी Nomination Facility (नामांकन सुविधा) के नियम पूरी तरह से बदल दिए गए हैं।
इन नए नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार या वारिस को खाते या लॉकर में रखे पैसे और सामान आसानी से मिल सकें। ये नए नियम 1 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू होंगे। इसके साथ ही RBI ने पिछले कई दशकों में जारी किए गए 31 पुराने नियम और सर्कुलर रद्द कर दिए हैं।
नॉमिनी कौन होता है और क्या रोल होता है?
नॉमिनी (Nominee) वह व्यक्ति होता है जिसे आप अपने बैंक खाते, लॉकर, बीमा पॉलिसी या किसी निवेश के लिए नामांकित करते हैं, ताकि आपकी मृत्यु के बाद उस खाते या निवेश में मौजूद पैसे या संपत्ति को अस्थायी रूप से वह प्राप्त कर सके। आसान शब्दों में कहें तो नॉमिनी वह भरोसेमंद व्यक्ति होता है जिसे आप यह जिम्मेदारी देते हैं कि आपके न रहने पर आपका पैसा या सामान सुरक्षित रहे और उसे आपके परिवार या कानूनी वारिस तक पहुंचाया जा सके।
नॉमिनी का रोल बेहद अहम होता है। अगर खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक या वित्तीय संस्था सबसे पहले उसी व्यक्ति को पैसे या लॉकर की वस्तुएं सौंपती है जिसे नॉमिनी बनाया गया होता है। इससे परिवार को तुरंत आर्थिक मदद मिलती है और लंबी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ता। बैंक के लिए भी यह प्रक्रिया आसान हो जाती है, क्योंकि उन्हें कोर्ट या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Legal Heir Certificate) का इंतजार नहीं करना पड़ता। हालांकि यह समझना जरूरी है कि नॉमिनी असली मालिक नहीं होता। नॉमिनी केवल एक “अस्थायी धारक” (Temporary Holder) की भूमिका निभाता है, जो पैसे या संपत्ति को संभालता है और बाद में इसे असली मालिक यानी कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को सौंप देता है।
इसलिए नॉमिनी बनाना जरूरी है, ताकि खाताधारक की मृत्यु के बाद पैसा या संपत्ति “अटकी” न रहे और परिवार को तुरंत सहारा मिल सके। नॉमिनी से बैंक और परिवार दोनों के लिए प्रक्रिया आसान हो जाती है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि लोग नॉमिनी के महत्व को समझें और समय-समय पर अपने खातों, निवेशों और बीमा पॉलिसियों में सही व्यक्ति को नॉमिनी बनाएं। इससे भविष्य में परिवार को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
RBI ने क्या किए बदलाव
RBI के नए दिशानिर्देशों के तहत अब हर बैंक को अपने ग्राहकों को Nomination सुविधा देना अनिवार्य होगा। यानी जब भी कोई नया खाता खुलेगा, बैंक को ग्राहक को यह बताना होगा कि वह अपने खाते, लॉकर या सेफ कस्टडी के लिए किसी को नॉमिनी बना सकता है। अगर ग्राहक किसी कारणवश नामांकन नहीं करना चाहता है, तो बैंक को उससे एक लिखित डिक्लेरेशन (Written Declaration) लेना होगा। लेकिन अगर ग्राहक लिखित में देने से इनकार करता है, तो बैंक को उसका खाता खोलने से मना नहीं किया जा सकता।
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि नॉमिनी से जुड़ा कोई भी काम चाहे नया नाम जोड़ना हो, बदलना हो या हटाना तीन कार्यदिवस (3 working days) के अंदर पूरा किया जाना चाहिए। अगर ग्राहक का फॉर्म अधूरा या गलत पाया जाता है, तो बैंक को तीन दिन के भीतर ग्राहक को इसका कारण बताना जरूरी होगा। इससे नामांकन प्रक्रिया में देरी और भ्रम खत्म होगा।
अब ग्राहकों की पासबुक, अकाउंट स्टेटमेंट या टर्म डिपॉजिट रिसीट (TDR) पर यह स्पष्ट रूप से लिखा होगा “Nomination Registered”, यानी इस खाते में नॉमिनी की जानकारी दर्ज है। इसके साथ नॉमिनी का नाम भी पासबुक या TDR पर छपा होगा। इससे भविष्य में परिवार को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस खाते या निवेश में कौन नॉमिनी है।
क्या है नॉमिनी का रोल?
इन बदलावों से खाताधारक के निधन के बाद परिवार के लिए क्लेम प्रोसेस बेहद आसान हो जाएगा। अब बैंकों को कानूनी झंझटों में पड़े बिना सीधे नॉमिनी को पैसे या लॉकर में रखी वस्तुएं देने की सुविधा मिलेगी। अगर किसी खाते में एक से अधिक नॉमिनी हैं और उनमें से कोई एक नॉमिनी गुजर चुका है, तो बैंक बाकी बचे नॉमिनी को ही भुगतान करेगा।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति अपने नाम से प्रोप्राइटरशिप फर्म (Proprietorship Firm) का खाता चला रहा है, तो उसे भी व्यक्तिगत खाते की तरह ही नॉमिनी की सुविधा दी जाएगी। इसका मतलब है कि ऐसे खातों में भी नामांकन करना अब आसान और जरूरी हो जाएगा।
इसके अलावा, RBI ने बैंकों को यह आदेश दिया है कि वे ग्राहकों को नॉमिनी सुविधा के महत्व के बारे में जागरूक करें। इसके लिए बैंकों को पासबुक, चेकबुक और अन्य फॉर्म्स पर संदेश छापने होंगे, साथ ही उन्हें अवेयरनेस कैंपेन और वर्कशॉप भी आयोजित करनी होंगी ताकि लोग समय रहते अपने खातों में नॉमिनी जोड़ सकें।
31 पुराने नियम हुए कैंसिल
सबसे अहम बात यह है कि RBI ने 1986 से 2021 तक जारी किए गए 31 पुराने सर्कुलर और गाइडलाइंस को अब पूरी तरह रद्द कर दिया है। अब यह पूरी व्यवस्था नए नियमों “Reserve Bank of India (Nomination Facility in Deposit Accounts, Safe Deposit Lockers and Articles kept in Safe Custody) Directions, 2025” के तहत चलेगी।
