लोन गारंटर बनने से पहले 2 बार सोचें! उधार लेने वाला किया डिफॉल्ट तो आपको लगेगा ये बड़ा झटका

किसी करीबी की मदद करने के लिए गारंटर बनना भावनात्मक फैसला हो सकता है, लेकिन इसका असर पूरी तरह वित्तीय होता है। इसलिए सिर्फ रिश्ते या भरोसे के आधार पर गारंटी न दें।

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनना अक्सर एक छोटी-सी मदद लगती है। आपको लगता है कि आपके गारंटर बनने से उसे आसानी से लोन मिल गया और उसका काम हो गया है। लेकिन यह जान लें कि लोन का गारंटर बनना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। अगर किसी कारण से लोन लेने वाले व्यक्ति ने लोन की ईएमआई नहीं चुका पा रहा है तो आप पर वह पूरी वित्तीय जिम्मेदारी आ जाती है। लोन के डिफॉल्ट की स्थिति में आपकी जेब, क्रेडिट स्कोर और भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर असर पड़ता है। इसलिए लोन गारंटर बनने से पहले 2 बार जरूर सोचें। आइए जानते हैं कि लोन गारंटर बनने के मायने क्या हैं?

Loan Granter

लोन गारंटर

उधार लेने वाला EMI नहीं चुकाए तो क्या होगा?

गारंटर बनने का सबसे बड़ा जोखिम यही है। अगर लोन लेने वाला व्यक्ति ईएमआई देना बंद कर देता है, तो लोन एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक गारंटर पर भुगतान की जिम्मेदारी आ सकती है। भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 के तहत सामान्य तौर पर गारंटर की देनदारी मुख्य उधारकर्ता की देनदारी के साथ जुड़ी होती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि बैंक पहले हमेशा केवल उधार लेने वाले से ही पूरी रकम वसूल करेगा। गारंटर को यह भी देखना चाहिए कि उसकी जिम्मेदारी सिर्फ मूल रकम तक सीमित है या इसमें ब्याज, पेनल्टी, कानूनी खर्च और दूसरे चार्ज भी शामिल हैं।

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