पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट के बीच 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल व्यापार को खतरे में डाल दिया है। इस समुद्री रास्ते पर ईरान (Iran) का मजबूत नियंत्रण है, और अब खबरें आ रही हैं कि अमेरिका अपने हजारों जमीनी सैनिकों को इस इलाके में भेज रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नजर ईरान के खर्ग द्वीप पर है, जहां से ईरान का 90% तेल निर्यात होता है। लेकिन क्या खर्ग पर कब्जा करना ही काफी होगा? युद्ध के रणनीतिकारों का मानना है कि असली खेल उन सात द्वीपों में छिपा है, जिन्हें होर्मुज खोलने की 'चाबी' कहा जाता है।
Hormuz खोलने की 'चाबी' हैं ये 7 आइलैंड! ईरान का है पहरा, क्या अमेरिकी सेना कर पाएगी कब्जा?
ईरान का 'आर्क डिफेंस' और 7 द्वीपों का जाल
चीन और ईरान के शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि अबू मूसा, ग्रेटर तुंब, लेसर तुंब, हेंगम, केश्म, लारक और होर्मुज ये सात द्वीप मिलकर एक 'काल्पनिक रेखा' बनाते हैं, जिसे ईरान का 'आर्क डिफेंस' कहा जाता है। ये द्वीप भौगोलिक रूप से इस तरह स्थित हैं कि फारस की खाड़ी में आने-जाने वाले हर जहाज को इनके पास से गुजरना ही पड़ता है। उथले पानी और कम गहराई के कारण बड़े तेल टैंकरों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता, जिससे वे ईरानी सेना (IRGC) की मिसाइलों, ड्रोनों और बारूदी सुरंगों का आसान निशाना बन जाते हैं।
अबू मूसा और तुंब द्वीपों की अहमियत
इन सातों में सबसे छोटे लेकिन सबसे महत्वपूर्ण द्वीप हैं अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब। अमेरिकी पैसिफिक कमांड के पूर्व निदेशक कार्ल शूस्टर का कहना है कि ये द्वीप 'रणनीतिक पावर हाउस' हैं। यहां से ईरान पूरे समुद्री यातायात को अपनी मुट्ठी में रखता है। अगर अमेरिका को होर्मुज का रास्ता साफ करना है, तो उसे खर्ग के बजाय इन द्वीपों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। हालांकि, यह इतना आसान नहीं है। इन द्वीपों पर कब्जे की कोशिश का मतलब होगा सीधे ईरानी मुख्य भूमि से आने वाले मिसाइल और तोपखाने के हमलों का सामना करना।
अमेरिका के सामने दोहरी चुनौती
अमेरिकी सेना के लिए यह मिशन एक 'डेथ ट्रैप' साबित हो सकता है। न्यूयॉर्क के सूफान सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, इन द्वीपों पर नियंत्रण पाने की कोशिश में अमेरिका एक लंबे और खूनी संघर्ष में उलझ सकता है, जिसमें भारी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। इसके अलावा, यहां एक कूटनीतिक उलझन भी है। इन द्वीपों पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच पुराना विवाद है। अगर अमेरिका इन पर कब्जा करता है, तो उसे यह तय करना होगा कि भविष्य में ये द्वीप किसे सौंपे जाएंगे। अगर वह इन्हें नई ईरानी सरकार को देने की बात करता है, तो UAE जैसा मित्र देश नाराज हो सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। अगर ईरान इन द्वीपों के जरिए इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फिलहाल, सबकी नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं क्या वह इन रणनीतिक 'चाबियों' पर कब्जा कर व्यापार का रास्ता खोलेगा, या फिर यह इलाका तीसरे विश्व युद्ध का केंद्र बन जाएगा?
