लक्सर ग्रुप मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पत्नी उषा जैन के पक्ष में फैसला बरकरार

लक्सर ग्रुप के संस्थापक दिवंगत डी.के. जैन की वसीयत को लेकर चल रहा वर्षों पुराना विवाद आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ समाप्त हो गया। अदालत ने वसीयत को वैध मानते हुए संपत्ति का अधिकार उनकी पत्नी उषा जैन के पक्ष में बरकरार रखा, जिससे मामला आखिरकार सुलझ गया।

प्रतिष्ठित बिजनेस समूह लक्सर ग्रुप और भारत में पेन्सिल और कलर बनाने वाली कंपनी के संस्थापक दिवंगत डी.के. जैन की वसीयत को लेकर वर्षों से जारी कानूनी विवाद का पटाक्षेप आज सुप्रीम कोर्ट में हो गया। अदालत ने वसीयत पर जारी प्रोबेट (न्यायिक अनुमोदन) को पूरी तरह बरकरार रखते हुए संपत्ति को उनकी पत्नी उषा जैन के नाम करने के आदेश को अंतिम रूप दे दिया।

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वसीयत की वैधता को लेकर बच्चों ने उठाए थे सवाल

डी.के. जैन का निधन वर्ष 2014 में हुआ था। उनकी वसीयत की प्रामाणिकता को उनके तीन बच्चों पायल कपूर, पंकज जैन और प्रिया जैन ने चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। लंबी सुनवाई के बाद 27 मई 2025 को अदालत ने वसीयत को सही ठहराते हुए पूरी संपत्ति का अधिकार उषा जैन को सौंप दिया था। बाद में यह फैसला 19 अगस्त 2025 को डिवीजन बेंच द्वारा भी बरकरार रखा गया।

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