डिजिटल ठगी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा चाबुक, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मिलेगी पूरी रकम

Digital Fraud: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डिजिटल धोखाधड़ी में बैंक की लापरवाही साबित होने पर पीड़ितों को उनकी गंवाई गई पूरी रकम का मुआवजा मिलना चाहिए। अदालत ने आरबीआई को कड़े नियम और जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है।

Digital Fraud : देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी वारदातों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान कहा है कि अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान की उचित जांच-पड़ताल और लापरवाही के कारण कोई ग्राहक ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो बैंक को पीड़ित को उसकी गंवाई गई पूरी रकम के बराबर मुआवजा देना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही तय करने और धोखाधड़ी रोकने के लिए बेहद कड़े नियम बनाए जाने की जरुरत है।

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डिजिटल धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मिले पूरा मुआवजा

साइबर अपराधों के आंकड़े और आरबीआई की नई गाइडलाइंस

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हालांकि साइबर अपराध के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है, फिर भी इस साल अब तक लोगों को करीब 800 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें मुआवजे, धोखाधड़ी की रोकथाम और बैंकों की जवाबदेही के स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट आरबीआई के प्रस्तावित 'अपने ग्राहक को जानें' (केवाईसी) संशोधन निर्देश, 2026 की पहले समीक्षा करेगा। इन नए निर्देशों को 30 नवंबर तक अधिसूचित करने और 31 दिसंबर तक लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों में यह अनिवार्य होना चाहिए कि यदि बैंक की किसी चूक से धोखाधड़ी हुई है, तो ग्राहक को पूरा मुआवजा मिले।

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