राज्यों का कुल खर्च वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच 131 प्रतिशत बढ़ गया है। इस दौरान राज्यों ने आर्थिक विकास की रफ्तार के साथ कदम मिलाते हुए जनता के कल्याण और विकास योजनाओं पर लगातार ध्यान दिया। यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार राज्यों का कुल खर्च 2015-16 में 22.18 लाख करोड़ रुपये था।
कैग के प्रमुख के. संजय मूर्ति द्वारा जारी 'स्टेट फाइनेंस 2024-25' रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) का रहा। औसतन 83 प्रतिशत से अधिक राशि वेतन, पेंशन, सब्सिडी और अन्य दैनिक प्रशासनिक जरूरतों पर खर्च की गई। वहीं, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में भी बढ़ोतरी हुई, लेकिन कुल खर्च में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही।
रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं पर कुल व्यय का लगभग दो-तिहाई हिस्सा खर्च हुआ, जो राज्यों की कल्याण और विकास पर ध्यान देने की नीति को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी ने लगातार राजस्व व्यय का आधे से अधिक हिस्सा गया। 2024-25 में यह 53.31 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसमें सब्सिडी में विशेष रूप से तेज वृद्धि देखी गई।
इन चीजों में हुआ ज्यादातर खर्च
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों का ज्यादातर खर्च केवल आठ प्रमुख मदों पर केंद्रित रहा। इनमें विभिन्न प्रकार के अनुदान, कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, कर्ज पर ब्याज भुगतान, सब्सिडी और बड़े विकास कार्य शामिल हैं। इन मदों पर कुल सरकारी खर्च का करीब 78.46 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया गया। वहीं, यह राशि सभी राज्यों के संयुक्त सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 12.38 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के बजट में अनिवार्य और तय खर्चों का दबदबा बना हुआ है। राज्यों का कुल खर्च 2015-16 में 22.18 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 51.20 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी इस दौरान कुल खर्च में 131 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन वर्षों में खर्च के स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। राज्यों के बजट का बड़ा हिस्सा लगातार कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, कर्ज पर ब्याज, सब्सिडी और विभिन्न प्रकार के अनुदानों पर खर्च होता रहा। यही मदें कुल सरकारी खर्च में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं।
रिपोर्ट में यह भी बड़ी बातें
वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्यों का बजट व्यय कुल जीएसडीपी के 15.78 प्रतिशत से 17.49 प्रतिशत के बीच रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 51.20 लाख करोड़ रुपये के व्यय में सामान्य क्षेत्र का हिस्सा 29.79 प्रतिशत, सामाजिक क्षेत्र का 39 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र का 28.68 प्रतिशत रहा। व्यय की संरचना में पूंजीगत निवेश सामान्य क्षेत्र में 5.28 प्रतिशत, सामाजिक क्षेत्र में 31.60 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र में 62.71 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट में कहा गया कि आर्थिक क्षेत्र में पूंजीगत निवेश का बड़ा हिस्सा जाता है, जबकि प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों वाला सामान्य क्षेत्र मुख्यतः राजस्व आधारित है। राज्यों की अपनी कर आय (एसओटीआर) राजस्व प्राप्तियों का सबसे बड़ा घटक रही, जो 49.55 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 50.13 प्रतिशत हो गई। हालांकि, वित्त वर्ष 2024-25 में इसकी वृद्धि दर में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।
(इनपुट-भाषा)
