हम अक्सर सुनते हैं कि निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी कर देनी चाहिए। लेकिन बहुत से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और सोचते हैं कि अभी तो कमाने की शुरुआत है, आगे चलकर जब सैलरी बढ़ेगी तब निवेश कर लेंगे। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो सावधान हो जाइए। फाइनेंस की दुनिया में एक कहावत है "समय ही पैसा है।" निवेश के मामले में यह बात बिल्कुल सच साबित होती है। म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करते समय आपकी उम्र बहुत मायने रखती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने के बजाय 35 साल की उम्र में शुरुआत करते हैं, तो सिर्फ इस 10 साल की देरी की वजह से आपको अपने रिटायरमेंट फंड में करीब ₹25 लाख का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ सकता है।
10 साल से कितना फर्क पड़ेगा SIP पर असर?
मान लीजिए दो दोस्त हैं अमित और राहुल। अमित ने अपनी नौकरी के शुरुआती दिनों में यानी 25 साल की उम्र में ही ₹2,500 प्रति माह की एक छोटी सी SIP शुरू कर दी। वहीं, राहुल ने सोचा कि अभी जिंदगी का आनंद लेते हैं और उसने ठीक 10 साल बाद यानी 35 साल की उम्र में उसी ₹2,500 प्रति माह की रकम से अपनी SIP की शुरुआत की। दोनों ही दोस्त अपनी 60 साल की उम्र यानी रिटायरमेंट तक लगातार निवेश करते हैं। अगर हम म्यूचुअल फंड का एक औसत और सामान्य सालाना रिटर्न 12% भी मानकर चलें, तो जब दोनों 60 साल के होंगे, तो उनके फंड की रकम में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलेगा।
25 लाख का होगा नुकसान
60 साल की उम्र में अमित का कुल फंड (Corpus) लगभग ₹43.5 लाख से ज्यादा का हो जाएगा, जबकि उतनी ही रकम हर महीने जमा करने के बावजूद 35 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले राहुल का फंड सिर्फ ₹18.7 लाख के आसपास ही सिमट कर रह जाएगा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राहुल ने अमित से सिर्फ ₹3 लाख कम निवेश किए (10 साल में ₹2,500 महीने के हिसाब से), लेकिन जब रिटर्न की बात आई तो उसे करीब ₹25 लाख का सीधा फटका लग गया। इसी जादुई और हैरान करने वाले अंतर को फाइनेंस की भाषा में 'पावर ऑफ कंपाउंडिंग' (Power of Compounding) यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत कहा जाता है।
कंपाउंडिंग का सीधा सा नियम है कि आप अपने पैसे को बाजार में जितना अधिक समय देंगे, वह उतना ही तेजी से बढ़ेगा। जब आप जल्दी निवेश शुरू करते हैं, तो आपके निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है, जिससे आपका पैसा एक बर्फ के गोले (Snowball) की तरह साल-दर-साल बड़ा होता जाता है। शुरुआती सालों का यह फायदा आखिरी सालों में बहुत विशाल रूप ले लेता है।
