Silver Price Forecast 2026: साल 2025 चांदी निवेशकों के लिए बेहद शानदार रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब 170 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इस दौरान चांदी न केवल सोने से आगे निकल गई, बल्कि शेयर बाजार और अन्य बड़े निवेश विकल्पों को भी पीछे छोड़ दिया। घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि यह तेजी अभी खत्म नहीं हुई है और वर्ष 2026 में चांदी नए रिकॉर्ड बना सकती है।
चांदी की बंपर तेजी: निवेशकों की चांदी, मोतीलाल ओसवाल को दिख रहे नए शिखर (तस्वीर-istock)
2025 की सबसे बेहतरीन कीमती धातु बनी चांदी
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चांदी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कीमती धातु रही। जहां आमतौर पर निवेशक अनिश्चित समय में सोने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं इस बार चांदी ने बेहतर रिटर्न देकर सबको चौंका दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि चांदी ने न केवल सोने को पछाड़ा, बल्कि कई अन्य लोकप्रिय निवेश साधनों से भी ज्यादा मुनाफा दिया।
तेजी के पीछे ये रहे बड़े वैश्विक कारण
रिपोर्ट के अनुसार, चांदी और सोने की कीमतों में आई इस तेज उछाल के पीछे कई वैश्विक वजहें रहीं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार को लेकर अनिश्चित माहौल और कई देशों की आसान मौद्रिक नीतियां इसकी प्रमुख वजह बनीं। इसके अलावा एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में बढ़ता निवेश, चांदी की सीमित आपूर्ति और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने भी कीमतों को मजबूत सहारा दिया।
2026 के लिए चांदी का बड़ा टारगेट
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार मोतीलाल ओसवाल ने वर्ष 2026 के लिए MCX पर चांदी का लक्ष्य 3.20 लाख रुपए प्रति किलो तय किया है। वहीं, जोखिम से बचाव के लिहाज से इसका स्टॉप लॉस स्तर 1.40 लाख रुपए बताया गया है। मौजूदा कीमत करीब 2.52 लाख रुपए प्रति किलो को देखते हुए, ब्रोकरेज को इसमें करीब 27 प्रतिशत और तेजी की उम्मीद है।
उम्मीद से पहले पूरे हुए पुराने लक्ष्य
ब्रोकरेज ने बताया कि चांदी के लिए पहले दिए गए टारगेट उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी पूरे हो गए। साल 2025 की शुरुआत में अनुमान लगाया गया था कि साल के अंत तक सोना 84,000 रुपए और चांदी 1,10,000 रुपए तक पहुंचेगी। लेकिन सोना तो पहली ही तिमाही में 84,000 रुपए तक पहुंच गया और बाद में बढ़कर 1,40,465 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर चला गया।
चांदी ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
वहीं चांदी दूसरी तिमाही तक ही 88,000 रुपए के पार निकल गई और इसके बाद लगातार तेजी जारी रही। अंत में चांदी ने 2,54,000 रुपए प्रति किलो का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया। यह ब्रोकरेज के शुरुआती अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा था, जिसने बाजार को हैरान कर दिया।
चांदी की दोहरी भूमिका बनी सबसे बड़ी ताकत
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन इसलिए किया क्योंकि इसकी दोहरी भूमिका है। यह एक तरफ सुरक्षित निवेश के तौर पर इस्तेमाल होती है, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों में इसकी भारी मांग रहती है। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों ने इसे सुरक्षित विकल्प माना, जबकि औद्योगिक जरूरतों ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया।
औद्योगिक मांग ने बढ़ाई चमक
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चांदी की औद्योगिक मांग अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इसकी सबसे बड़ी वजह सौर ऊर्जा संयंत्रों की बढ़ती संख्या, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट और पावर ग्रिड में लगातार हो रहा निवेश रहा।
लगातार पांचवें साल आपूर्ति से ज्यादा खपत
इतनी मजबूत मांग के कारण चांदी की खपत लगातार पांचवें साल उसकी आपूर्ति से ज्यादा रही। इससे बाजार में चांदी की कमी बनी रही और कीमतों को मजबूती मिलती रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ समय के लिए कीमतों में आई हल्की गिरावट एक दुर्लभ स्थिति थी, जो यह दिखाती है कि बाजार में चांदी की वास्तविक उपलब्धता काफी कम है।
