Silver Price Crash: चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में रिकॉर्ड हाई छूने के बाद अब चांदी एक ही झटके में करीब 21 हजार रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई है। MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों दोनों के बीच हलचल मच गई है।
सोमवार को MCX पर मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी की कीमत करीब 2,37,333 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड करती दिखी। इसमें करीब 2,454 रुपये या 1.02 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दिन के कारोबार में चांदी का भाव 2,33,120 रुपये के निचले स्तर तक भी फिसल गया, जबकि इसका इंट्राडे हाई करीब 2,54,174 रुपये रहा। अगर हालिया रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो चांदी करीब 21, 054 रुपये तक नीचे आ चुकी है।
रिकॉर्ड हाई से अचानक गिरावट क्यों?
दरअसल, बीते कुछ दिनों में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत डिमांड, औद्योगिक उपयोग और सुरक्षित निवेश के तौर पर बढ़ते रुझान की वजह से चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन जैसे ही मुनाफावसूली शुरू हुई, कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा काटना शुरू कर दिया, जिससे चांदी पर दबाव बढ़ गया। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में हल्की तेजी ने भी कीमती धातुओं की चमक फीकी की है।
ग्लोबल फैक्टर्स का भी असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों ने बाजार की चाल को प्रभावित किया है। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है, तो निवेशक सोने-चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं।
इसके अलावा चीन और यूरोप से जुड़े आर्थिक आंकड़ों ने भी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर दबाव बनाया है। चांदी का बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल यूज में जाता है, इसलिए ग्लोबल ग्रोथ की चिंता कीमतों पर असर डालती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
चांदी में आई इस गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आगे क्या रणनीति अपनाई जाए। जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका हो सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी का लॉन्ग टर्म आउटलुक अब भी मजबूत है, क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतें अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेंगी।
कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिल सकता है। अगर यह नरमी कुछ समय तक बनी रहती है, तो चांदी के गहनों, बर्तनों और सिक्कों की खरीद थोड़ी सस्ती हो सकती है। हालांकि, रिटेल मार्केट में कीमतें MCX से थोड़ा अलग होती हैं, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और टैक्स भी जुड़ता है।
आगे के लिए क्या है राय?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतों में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर ग्लोबल मार्केट से मजबूत संकेत मिलते हैं और इंडस्ट्रियल डिमांड बनी रहती है, तो चांदी फिर से संभल सकती है। वहीं अगर डॉलर और ब्याज दरों का दबाव बढ़ता है, तो कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
