Silver Rate Record High: चांदी की कीमतें लगातार रिकॉर्ड बढ़ रही हैं, अब तो इसकी कीमत 1 लाख 43 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक 29 सितंबर 2025 को चांदी की कीमत बढ़कर 143668 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई। साल 2025 में चांदी की कीमतों ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए हैं और 143000 रुपए पहुंच गई है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, इस बढ़त के पीछे त्योहारी सीजन, औद्योगिक मांग और निवेशकों की मजबूत रुचि मुख्य वजह रही।
1 जनवरी को कितनी थी कीमत
साल की शुरुआत में 1 जनवरी 2025 को शुद्ध चांदी की कीमत ₹93,500 प्रति किलोग्राम थी। तब से अब तक यह लगभग ₹50400 प्रति किलो या करीब 34% बढ़ गई है। इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है और चांदी को इस साल एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प बना दिया है।
चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है और डेढ़ लाख रुपए के ऐतिहासिक लेवल की ओर बढ़ रही है। एमसीएक्स पर कारोबारी सत्र के दौरान चांदी 2,079 रुपए प्रति किलोग्राम की तेजी के साथ 1,43,968 रुपए के नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं। जबकि सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर चांदी 1,800 रुपए से ज्यादा की तेजी के साथ 1,43,708 रुपए पर कारोबार कर रही थी। चांदी की शुरुआत कारोबारी सत्र में 1,41,758 रुपए के साथ हुई थी।
एक महीने में कितनी बढ़ीं कीमतें
सितंबर के महीने में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। बीते एक महीने में चांदी ने निवेशकों को सोने से ज्यादा का रिटर्न दिया है। ये अंतर भी काफी ज्यादा है। एमसीएक्स के आंड़ों के अनुसार अगस्त महीने के आखिरी कारोबारी दिन चांदी की कीमत 1,21,873 रुपए थी, जिसमें अब तक 22,095 रुपए का इजाफा देखने को मिल चुका है। इसका मतलब है कि चांदी सितंबर के महीने में 18.13 फीसदी का रिटर्न दे चुका है।
क्या दिवाली पर नया रिकॉर्ड बनाएगी चांदी?
विशेषज्ञों का मानना है कि दिवाली तक सोना और चांदी नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच सकते हैं। जानकारों के मुताबिक, सोना 1.25 लाख रुपए और चांदी 1.50 लाख रुपए तक जा सकती है। इसके पीछे वजहें हैं वैश्विक और ट्रेड तनाव, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, ईटीएफ फ्लो और देश में फेस्टिव सीजन में बढ़ती मांग। इन सभी कारकों से आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमत में और इजाफा होने की संभावना है।क्यों बढ़ रही हैं कीमतें
चांदी की कीमतें कई कारणों से बढ़ रही हैं। इसकी औद्योगिक मांग में वृद्धि सबसे बड़ी वजह है। चांदी सिर्फ गहनों के लिए नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और इलेक्ट्रिक वाहनों में भी इस्तेमाल होती है। इसके अलावा, उत्पादन की कमी, रुपये की कमजोरी और निवेशकों का सुरक्षित संपत्ति की ओर रुझान भी कीमतों को बढ़ावा दे रहे हैं। त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह जैसी मौसमी मांग भी इसका एक अहम कारण है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में तेजी, ईटीएफ में निवेश, उच्च मांग और कम उपलब्धता ने चांदी को घरेलू बाजार में नया रिकॉर्ड दिलाया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज एक्सपर्ट सौमिल गांधी के अनुसार, चांदी 14 वर्षों में पहली बार 45 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंची है।
व्यापारियों के मुताबिक, घरेलू सर्राफा बाजार में तेजी त्योहारी खरीदारी और वैश्विक आर्थिक संकेतों की वजह से बनी हुई है। केंद्रीय बैंकों द्वारा भंडार में विविधता लाने की पहल और रुपये में कमजोरी के संकेतों ने भी कीमती धातुओं को समर्थन दिया है। मिराए एसेट के प्रवीण सिंह ने कहा कि पीसीई मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी चांदी पर थोड़े दबाव डाल सकती है, लेकिन गिरावट सीमित रहने की संभावना है।
