नई दिल्ली. आजकल ज्यादातर लोग अपने क्रेडिट कार्ड से न सिर्फ अपनी खरीदारी करते हैं, बल्कि अक्सर दोस्तों या परिवार की मदद के लिए भी पेमेंट कर देते हैं। कभी किसी का फ्लाइट टिकट बुक कर दिया, कभी लैपटॉप खरीद दिया, तो कभी होटल बुकिंग कर दी। दोस्त भी तुरंत पैसे लौटा देता है, इसलिए हमें लगता है कि इसमें कोई खतरा नहीं है। लेकिन अगर यही ‘मदद’ आदत बन जाए और बार-बार कार्ड से बड़े ट्रांजैक्शन होने लगें, तो इनकम टैक्स विभाग इसे साधारण मदद नहीं, बल्कि आय का पैटर्न भी मान सकता है।
यानी, अगर आपके कार्ड से लगातार दूसरों के लिए पेमेंट हो रहे हैं और आपके खाते में बार-बार पैसे वापस आ रहे हैं, तो टैक्स अधिकारियों की नजर इस पर जरूर जाएगी। आज के समय में टैक्स सिस्टम काफी स्मार्ट है और बैंक हर बड़े लेन-देन की जानकारी टैक्स विभाग को भेजते हैं। ऐसे में एक छोटा-सा कदम आपके लिए बड़ा टैक्स रिस्क बना सकता है।
छोटी मदद कब बन जाती है टैक्स रिस्क?
मान लीजिए राहुल ने अपने दोस्त अजय के लिए 75,000 रुपये का लैपटॉप खरीद दिया। अजय ने अगले दिन यह पैसे राहुल के बैंक अकाउंट में वापस भेज दिए। एक-दो बार तक यह बिल्कुल सामान्य है। लेकिन मान लें कि राहुल हर महीने किसी न किसी दोस्त के लिए बड़े-बड़े पेमेंट करता है और बाद में पैसे वापस लेता है—तो यह पैटर्न एक तरह की कमाई जैसा दिखने लगता है।
टैक्स विभाग ऐसे पैटर्न पर शक कर सकता है। खासतौर पर जब क्रेडिट कार्ड का सालाना खर्च 10 लाख रुपये से ज्यादा हो जाए, तो बैंक यह जानकारी इनकम टैक्स विभाग को भेजते हैं। अगर कोई व्यक्ति 1 लाख रुपये से अधिक कैश में क्रेडिट कार्ड बिल भरता है, तो भी उसकी जांच शुरू हो सकती है।
अगर टैक्स अधिकारी को लगता है कि आपके खाते में बार-बार आने वाला पैसा किसी तरह की ‘छिपी हुई आय’ हो सकता है, तो वे पूछताछ जरूर करेंगे। इस स्थिति में भले ही आप साबित कर दें कि यह दोस्तों द्वारा लौटाया हुआ पैसा था, लेकिन जांच की प्रक्रिया में समय, दस्तावेज और कई बार जुर्माने का खतरा भी होता है।
टैक्स विभाग सवाल क्यों करता है?
टैक्स अधिकारियों का काम पैसों के आने-जाने पर नजर रखना होता है, न कि दोस्ती या रिश्तेदारी को समझना। वे सिर्फ यह देखते हैं कि किसके खाते में कितनी बार पैसे आ रहे हैं, ये पैसे किस कारण से आ रहे हैं और क्या इसे आय माना जा सकता है। अगर उन्हें लगता है कि यह ट्रांजैक्शन किसी बिजनेस, उधारी या कमाई जैसी गतिविधि का हिस्सा हो सकता है, तो वे नोटिस भेजकर पूछताछ शुरू कर सकते हैं। इसलिए दूसरों के लिए बार-बार बड़े ट्रांजैक्शन करना आपकी परेशानी बढ़ा सकता है और आपको अनचाही टैक्स जांच का सामना करना पड़ सकता है।
इन गलतियों से बचें, वरना बढ़ सकती है दिक्कत
कैश में पैसा वापस लेना
कैश सबसे बड़ा जोखिम है। कैश का स्रोत साबित करना मुश्किल होता है। एक बार कैश ट्रांजैक्शन दिख जाए, तो टैक्स अधिकारियों को समझाना मुश्किल हो जाता है।
बार-बार बड़े ट्रांजैक्शन करना
अगर हर महीने आपके कार्ड पर दूसरों के खर्च के कारण 50–60 हजार या उससे ज्यादा का बिल बनता है, तो यह आपकी वित्तीय प्रोफाइल को खराब कर सकता है।
बिना रिकॉर्ड के ट्रांजैक्शन करना
अगर लेन-देन के समय कोई प्रूफ न हो कि यह किसका खर्च था, तो टैक्स विभाग को साबित करना मुश्किल हो जाता है कि यह पैसा आपकी आय नहीं है।
तो फिर सुरक्षित तरीका क्या है?
- UPI, NEFT या IMPS जैसे ट्रेसेबल बैंकिंग चैनल्स से ही लेन-देन करें।
- कैश में कभी भी पेमेंट या रीपेमेंट ना लें।
- अगर रकम बड़ी है, तो एक छोटा-सा लिखित एग्रीमेंट, संदेश या ईमेल जरूर सुरक्षित रखें।
- क्रेडिट कार्ड को ‘उधारी बैंक’ की तरह इस्तेमाल करने से बचें।
कभी-कभार किसी की मदद करना ठीक है, लेकिन बार-बार और बड़े ट्रांजैक्शन करना जोखिम भरा हो सकता है। इनकम टैक्स विभाग आपकी मंशा नहीं, सिर्फ पैसों का हिसाब देखता है। इसलिए बेहतर है कि अपने क्रेडिट कार्ड को दूसरों के लिए मिनी बैंक ना बनने दें।
