Share Market Today : भारतीय शेयर बाजार में आज 13 जुलाई को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बिकवाली हावी है। बेंचमार्क इंडेक्स Sensex 675 अंक टूटकर 76,894 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी करीब 179 अंक की गिरावट के साथ 24,028 के आसपास पहुंच गया। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव US Iran War का है, जिसकी वजह से Crude oil Price में 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है। बाजार खुलते ही निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने हल्की मजबूती दिखाई।
शेयर बाजार में गिरावट (Image Source: iStock)
एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर
भारतीय बाजार पर एशियाई बाजारों की गिरावट का सीधा असर दिखाई दिया। जापान का निक्केई करीब 1.8 फीसदी टूटा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट भी 1.5 फीसदी से अधिक नीचे कारोबार कर रहा था। गिफ्ट निफ्टी भी करीब 0.8 फीसदी की कमजोरी के साथ संकेत दे रहा था कि घरेलू बाजार की शुरुआत दबाव में रहेगी।
कच्चे तेल में तेज उछाल ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 4 फीसदी बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 74 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
रुपया भी दबाव में
डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर दिखा। शुरुआती कारोबार में डॉलर-रुपया विनिमय दर 95.66 के आसपास रही। मजबूत डॉलर और ऊंचे कच्चे तेल के दाम आमतौर पर रुपये पर दबाव बढ़ाते हैं, जिसका असर विदेशी निवेश और बाजार की धारणा पर भी पड़ता है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव?
शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
- बैंकिंग शेयरों में करीब 0.8 फीसदी की गिरावट
- ऑटो सेक्टर करीब 1 फीसदी कमजोर
- मेटल शेयरों में लगभग 1 फीसदी की गिरावट
- फाइनेंशियल सर्विसेज भी दबाव में
- सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा
निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी?
आज कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहेगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में आगे की चाल, पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और रुपये की चाल सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी। यदि वैश्विक बाजारों में दबाव बना रहता है तो घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन पर नजर रखनी चाहिए।
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