Boss Scam Alert : अगर किसी कंपनी के CEO या Managing Director के नाम से अचानक WhatsApp पर मैसेज आए और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाए, तो बिना पुष्टि किए ऐसा करना भारी पड़ सकता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को ऐसे ही एक नए साइबर फ्रॉड 'Boss Scam' से सावधान रहने की चेतावनी दी है। इसमें ठग खुद को कंपनी के बड़े अधिकारी के रूप में पेश कर कर्मचारियों से करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लेते हैं।
बॉस के नाम से हो रही ठगी
SEBI ने बताया कि यह एडवाइजरी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिले इनपुट के बाद जारी की गई है। हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं में तेजी आई है, जहां साइबर अपराधी बड़ी कंपनियों के वित्त विभाग को निशाना बना रहे हैं।
क्या है Boss Scam?
Boss Scam को CEO या MD Impersonation Fraud भी कहा जाता है। इसमें साइबर ठग CEO, Managing Director या किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी की नकली पहचान बनाते हैं। इसके लिए वे ईमेल, WhatsApp, सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
इसके बाद वित्त विभाग या किसी कर्मचारी को बेहद जरूरी और गोपनीय बताते हुए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाता है। कई मामलों में कर्मचारियों पर यह कहकर दबाव बनाया जाता है कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दी जानी चाहिए।
AI Deepfake से बन रहे हैं नकली CEO
SEBI के मुताबिक अब अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वे AI की मदद से CEO की आवाज की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं। इसके बाद नकली वीडियो कॉल करते हैं। यहां तक कि फर्जी WhatsApp या सोशल मीडिया ग्रुप भी बना देते हैं। इससे कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाते हैं कि आदेश वास्तव में कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने ही दिया है। कुछ मामलों में यह भी कहा जाता है कि भुगतान किसी गोपनीय कारोबारी सौदे या अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी (UPSI) से जुड़ा है, इसलिए किसी से चर्चा न करें।
फाइल खोलते ही सब साफ
SEBI ने एक और खतरनाक तरीके के बारे में भी चेतावनी दी है। इसमें साइबर अपराधी WhatsApp या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक ZIP फाइल भेजते हैं। इस फाइल में मालवेयर छिपा होता है। अगर Windows कंप्यूटर पर इसे खोला जाए तो यह डिवाइस में इंस्टॉल होकर WhatsApp Web सेशन पर कब्जा कर सकता है। इसके बाद अपराधी उसी WhatsApp अकाउंट से वित्त विभाग को मैसेज भेजकर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं।
Contact List भी बदल देते हैं ठग
SEBI के मुताबिक कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का पूरा एक्सेस हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे अपने मोबाइल नंबर को पीड़ित के फोन में CEO या Managing Director के नाम से सेव कर देते हैं। जब उसी नंबर से मैसेज आता है तो कर्मचारी उसे असली अधिकारी का संदेश समझकर भुगतान कर देता है।
SEBI ने क्या सलाह दी?
SEBI ने कंपनियों और सभी रेगुलेटेड संस्थाओं को कुछ अहम सावधानियां बरतने की सलाह दी है। WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया पर मिले किसी भी भुगतान निर्देश की अलग से पुष्टि करें। सीधे संबंधित वरिष्ठ अधिकारी से फोन या किसी अन्य सुरक्षित माध्यम से संपर्क करें। इसके अलावा केवल मैसेज के आधार पर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें। किसी अनजान या संदिग्ध ZIP या EXE फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। जिन WhatsApp Web सेशन का उपयोग नहीं हो रहा, उनसे तुरंत लॉगआउट करें। कर्मचारियों को नियमित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दें।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
अगर किसी कंपनी या कर्मचारी को इस तरह की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
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