सेबी ने बदल दिए म्‍यूचुअल फंड के नियम, अब 40 कैटेगरी में होगा निवेश और 'इक्विटी फंड' से खरीदा जाएगा सोना-चांदी

अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके बड़े काम की है। मार्केट रेगुलेटर (SEBI) ने म्यूचुअल फंड के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब आपके इक्विटी (शेयर बाजार) वाले फंड का कुछ हिस्सा सोने और चांदी में भी निवेश किया जा सकेगा। इसके अलावा, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट के पुराने फंड्स की जगह अब नए तरह के 'लाइफ साइकिल फंड' लेंगे।

सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड हाउस को अब पहले से ज्यादा आजादी दे दी है। अब तक एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (जो मुख्य रूप से शेयरों में पैसा लगाते हैं) के पास शेयरों के अलावा जो एक्स्ट्रा पैसा बचता था, उसे वे केवल कैश या मनी मार्केट में ही रख सकते थे। लेकिन अब नए नियमों के तहत फंड मैनेजर उस पैसे से सोना और चांदी भी खरीद सकेंगे। मान लीजिए अगर कोई लार्जकैप फंड है, तो उसे कम से कम 80% पैसा बड़े शेयरों में लगाना होता है। बाकी बचा 20% हिस्सा अब फंड मैनेजर गोल्ड या सिल्वर इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब शेयर बाजार में गिरावट आएगी, तब सोने-चांदी में किया गया यह निवेश आपके पोर्टफोलियो को डूबने से बचाएगा और जोखिम (Risk) कम करेगा।

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रिटायरमेंट और बच्चों के लिए अब 'लाइफ साइकिल फंड'

सेबी ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए पुराने 'रिटायरमेंट' और 'चिल्ड्रन सॉल्यूशन' ओरिएंटेड फंड्स को पूरी तरह बंद कर दिया है। इनकी जगह अब 'लाइफ साइकिल फंड्स' (Life Cycle Funds) की नई कैटेगरी शुरू की गई है। ये फंड 5 से 30 साल की लंबी अवधि के लिए होंगे। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि शुरुआत में आपका ज्यादा पैसा शेयरों (इक्विटी) में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा रिटर्न मिल सके, लेकिन जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी या मैच्योरिटी का समय नजदीक आएगा, फंड मैनेजर खुद-ब-खुद उस पैसे को शेयरों से निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे डेट या गोल्ड) में डाल देगा। हालांकि, निवेशकों को लंबे समय तक रोके रखने के लिए इसमें से जल्दी पैसा निकालने पर पहले साल में 3% तक का भारी एग्जिट लोड भी लगाया जाएगा।

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