SBI 2 Year FD Calculation: देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई (SBI) अपने ग्राहकों को एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है। ऐसे में आप भी सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न के लिए FD (Fixed Deposit) में निवेश की योजना बना सकते हैं। अगर लंबे समय की अवधि के लिए निवेश नहीं करना चाहते हैं तो बैंक की 2 साल की एफडी में निवेश कर सकते हैं और महज 2 साल में 1 साल का ब्याज पा सकते हैं।
FD (Photo: iStock)
2 साल की FD पर कितनी है ब्याज दर
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दरअसल, एसबीआई (SBI) वर्तमान में 2 साल से अधिक लेकिन 3 साल से कम अवधि की एफडी पर सामान्य नागरिकों को 6.40 प्रतिशत और सीनियर सिटिजन ग्राहकों को 6.90 प्रतिशत की दर से ब्याज ऑफर कर रहा है।
1 लाख का ब्याज कैसे मिलेगा
अब अगर कोई सामान्य नागरिक SBI की FD scheme में 2 साल से अधिक (2 साल 1 दिन) के लिए 7,40,000 रुपये का निवेश करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे करीब 1,00,197 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। इसके बाद कुल मैच्योरिटी अमाउंट बढ़कर लगभग 8,40,197 रुपये हो जाएगा। यानी निवेशक को बिना मार्केट रिस्क के तय अवधि में 1 लाख रुपये से ज्यादा ब्याज कमाने का मौका मिल सकता है।
वहीं, सीनियर सिटिजन ग्राहकों को बैंक अतिरिक्त ब्याज दर का फायदा देता है। अगर कोई वरिष्ठ नागरिक 2 साल 1 दिन के लिए SBI की FD में 7 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसे मैच्योरिटी पर लगभग 1,02,638 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। इसके बाद कुल मैच्योरिटी राशि करीब 8,02,638 रुपये हो जाएगी।
| ग्राहक श्रेणी | निवेश राशि | अवधि | ब्याज दर | कुल ब्याज | मैच्योरिटी अमाउंट |
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्य नागरिक | ₹7,40,000 | 2 साल 1 दिन | 6.40% | ₹1,00,197 | ₹8,40,197 |
| सीनियर सिटिजन | ₹7,00,000 | 2 साल 1 दिन | 6.90% | ₹1,02,638 | ₹8,02,638 |
यहां खास बात यह है कि सीनियर सिटिजन्स को कम निवेश पर भी ज्यादा ब्याज कमाने का फायदा मिल रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले अधिक ब्याज दर ऑफर करता है। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद कई लोग अपनी सेविंग्स को FD में निवेश करना सुरक्षित मानते हैं।
FD पर मिलने वाले ब्याज पर TDS
हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। अगर एक वित्तीय वर्ष में FD से मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से ज्यादा हो जाता है तो बैंक TDS काट सकता है। सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा 50 हजार रुपये और सीनियर सिटिजन्स के लिए 1 लाख रुपये तक होती है। लेकिन अंतिम टैक्स देनदारी व्यक्ति की कुल आय और टैक्स स्लैब पर निर्भर करती है। अगर किसी व्यक्ति की कुल आय टैक्स सीमा से कम है तो वह TDS कटने से बच सकता है।
