Rupee vs US Dollar: अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार (27 मार्च 2026) को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89 पैसे टूटकर 94.85 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण घरेलू मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के चलते बढ़ते तनाव के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है। डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है, जबकि ऊर्जा आधारित महंगाई के खतरे ने रुपये को कमजोर किया है। इस स्थिति में जब तक कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं होती, रुपये पर दबाव बना रहेगा।
रुपया में रिकॉर्ड गिरावट, डॉलर की मजबूत स्थिति और निवेशकों की बिकवाली (तस्वीर-istock)
बाजार की शुरुआत और रिकॉर्ड स्तर
अंतरबैंक बाजार में रुपया 94.18 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और जल्दी ही 94.50 रुपये के स्तर को पार कर गया। अंत में यह 94.85 रुपये पर बंद हुआ। पिछले बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.96 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार को राम नवमी के कारण शेयर, विदेशी मुद्रा और जिंस बाजार बंद रहे।
एक्सपर्ट्स की राय
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष जतीन त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत के आयात खर्च पर दबाव बढ़ रहा है। इस वजह से रुपये में गिरावट जारी है। उन्होंने बताया कि निरंतर डॉलर की मांग और ऊर्जा आधारित मुद्रास्फीति रुपये को दबाव में रख रही है। तकनीकी रूप से 94.00 रुपये का स्तर अब प्रमुख प्रतिरोध के रूप में काम करेगा और अगला समर्थन स्तर 95.00 के पास देखा जा सकता है। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में सुधार नहीं होता, यह स्थिति बनी रहेगी।
डॉलर सूचकांक और वैश्विक बाजार
दूसरी ओर, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.94 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि डॉलर पूरी दुनिया में मजबूत हो रहा है।
शेयर बाजार पर असर
इस बीच, घरेलू शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 486.85 अंक यानी 2.09 प्रतिशत फिसलकर 22,819.60 अंक पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत में 2.69 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 110.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतों से न सिर्फ रुपये बल्कि समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने कुल 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस बिकवाली ने बाजार की गिरावट में और योगदान दिया।
