डॉलर के सामने रुपया फिर धड़ाम, आखिर रुपए में क्यों आई ऐतिहासिक गिरावट?

रुपया एक बार फिर डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। लगातार गिरावट ने बाजार और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आखिर क्या वजह है कि डॉलर मजबूत होता जा रहा है और रुपया इतना कमजोर? विदेशी निवेश की निकासी, आयातकों की भारी डॉलर खरीद और वैश्विक आर्थिक दबाव इन सबने मिलकर रुपये को नए लो पर पहुंचा दिया है।

भारत का रुपया एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में रुपये में 24 पैसों की गिरावट देखी गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.56 के स्तर पर आ गया। यह भारतीय मुद्रा के इतिहास का नया लो है। रुपये पर यह दबाव मुख्य रूप से विदेशी निवेश की निकासी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और आयातकों की बढ़ती डॉलर खरीदारी के कारण देखने को मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की मांग तेज होने और वैश्विक धातुओं की कीमतें बढ़ने से रुपये की कमजोरी और बढ़ी है।

Rupee Vs Dollar

गिरकर कहां पहुंचा रुपया?

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में शुक्रवार को रुपया 90.43 पर खुला था, लेकिन थोड़ी देर में यह फिसलकर 90.56 पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को भी रुपया 38 पैसे गिरकर 90.32 पर बंद हुआ था। लगातार गिरावट का यह क्रम निवेशकों के मनोबल को कमजोर कर रहा है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि आज रुपये का रेंज 90 से 90.60 के बीच रह सकता है और बाजार की नजर आरबीआई के संभावित कदमों पर टिकी है।

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