भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार को अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता है। ऐसे में बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को लेकर क्या फैसला करता है। कई विशेषज्ञों को संभावना है कि करीब साढ़े तीन साल बाद RBI रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।
क्या RBI इस बार दर बढ़ाने से बचेगा? (Photo: iStock)
सुबह 10 बजे गवर्नर देंगे जानकारी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद बुधवार सुबह 10 बजे नीतिगत फैसलों की जानकारी देंगे। अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो इसे RBI के नीतिगत रुख में बदलाव के तौर पर देखा जाएगा। खासकर ऐसे समय में जब केंद्रीय बैंक पिछले कुछ समय से ब्याज दरों को स्थिर रख रहा है।
फरवरी 2023 में आखिरी बार बढ़ी थी दर
RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी। उस समय केंद्रीय बैंक ने इसे 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद दर लंबे समय तक इसी स्तर पर रही। हालांकि, 2025 में RBI ने चार चरणों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों को 0.25% बढ़ोतरी की संभावना
पीटीआई-भाषा के सर्वे में शामिल ज्यादातर विशेषज्ञों ने इस मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि दर बढ़ाने के साथ RBI का रुख भी सख्त हो सकता है। हालांकि, नीतिगत रुख में बदलाव को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है।
क्या RBI इस बार दर बढ़ाने से बचेगा?
जहां कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी लगभग तय है, वहीं कुछ का मानना है कि RBI तत्काल दर बढ़ाने से बच सकता है। यानी बुधवार का फैसला महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक गतिविधियों के बीच केंद्रीय बैंक के संतुलन पर निर्भर करेगा।
महंगाई पर RBI की नजर
सरकार ने RBI को खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया है। इसमें 2 प्रतिशत की कमी या बढ़ोतरी की गुंजाइश है। लेकिन अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। ऐसे में महंगाई का बढ़ना RBI के लिए अहम चुनौती बना हुआ है।
