भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की स्थिरता को बढ़ाने के लिए खासतौर पर विदेशी निवेश को आकर्षित करने वाले उपायों पर जोर दिया है। शुक्रवार 5 जून, 2026 को रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने RBI MPC की बैठक के नतीजों के बारे में बताते हुए कहा, सरकार की तरफ से विदेशी निवेशकों को दी गई कर राहत (Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026) के साथ ही RBI के नए उपाय मिलकर भारत में विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेंगे।
रिजर्व बैंक ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उपाय किए
माना जा रहा है कि RBI की तरफ से किए गए उपायों से सरकारी बॉन्ड मार्केट के साथ ही शेयर बाजार, FDI और विदेशी मुद्रा जमा के जरिये डॉलर का इनफ्लो बढ़ेगा। जाहिर तौर पर इन उपायों का मकसद करंट अकाउंट और कैपिटल अकाउंट को मजबूत करना है। इसके साथ ही भारत की वित्तीय प्रणाली में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है।
सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश के लिए दरवाजे और खुले
RBI ने ऑटोमेटिक रूट यानी फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत अब विदेशी निवेशक 15 साल, 30 साल और 40 साल की अवधि वाले सभी नए सरकारी बॉन्ड में FAR के जरिये निवेश कर पाएंगे। इसके साथ ही मल्होत्रा ने बताया कि फॉरेन पोर्टफोलिया इन्वेस्टर्स (FPIs) के लिए General Route में लागू कई प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे। इस फैसले से शॉर्ट-टर्म निवेश, डॉलर इनफ्लो के साथ ही सरकार के लिए उधारी जुटाना आसान होगा।
NRI-OCI और विदेशी व्यक्तियों को शेयर बाजार में ज्यादा छूट
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि RBI ने शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRIs) और ओवरसीज सिटिजंंस ऑफ इंडिया (OCIs) के लिए निवेश सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। मौजूदा नियमों के तहत पोर्टफोलिया इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के जरिए कोई NRI या OCI किसी लिस्टेड भारतीय कंपनी में अधिकतम 5% हिस्सेदारी खरीद सकता है। वहीं, सभी NRI और OCI निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 10% तक सीमित रह सकती थी। लेकिन, अब RBI ने व्यक्तिगत निवेश सीमा को 5% से बढ़ाकर 10% और कुल निवेश सीमा को 10% से बढ़ाकर 24% करने को मंजूरी दी है।
PROIs के लिए भी खुला रास्ता
रिजर्व बैंक की तरफ से नियमों में दी गई ढील सिर्फ NRI और OCI तक सीमित नहीं रहेगी। RBI ने इसे सभी इंडिविजुअल पर्सन्स रेजिडेंट आउटसाइड इंडिया (PROIs) तक बढ़ाने का फैसला किया है। इससे वैश्विक स्तर पर रहने वाले व्यक्तिगत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश के नए अवसर खुलेंगे। यह कदम केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा को लागू करने की दिशा में उठाया गया है। इसके लिए आर्थिक मामलों के विभाग की तरफ से Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) (Third Amendment) Rules, 2026 अधिसूचित किए हैं।
PSU के विदेशी कर्ज को मिलेगा बढ़ावा
RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) को विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया है। केंद्रीय बैंक ने 30 सितंबर, 2026 तक PSU की तरफ से एक्सटर्नल कॉमर्सियल बॉरोइंग (ECBs) लेने पर रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा देने का फैसला किया है। इससे विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने की लागत कम होगी और PSU कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर पूंजी जुटा सकेंगी।
विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा
RBI ने बैंकों के लिए फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट बैंक (FCNRB) जमा जुटाना भी आसान बनाने का ऐलान किया है। इसके तहत 30 सितंबर, 2026 तक 3 से 5 साल की नए विदेशी जमा जुटाने वाले अधिकृत डीलर (AD) बैंकों के लिए हेजिंग लागत का पूरा बोझ RBI वहन करेगा। इससे बैंकों को अधिक विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने में मदद मिलेगी और देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ेगी।
निर्यातकों को भी मिली बड़ी राहत
RBI ने निर्यातकों के लिए भी राहत का ऐलान किया है। इसके लिए केंद्रीय बैंक ने निर्यात आय (Export Proceeds) को भारत में वापस लाने की समय सीमा फिर से 9 महीने करने का प्रस्ताव दिया है। इससे निर्यातकों को विदेशी भुगतान प्राप्त करने और नकदी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा। उद्योग जगत लंबे समय से इस अवधि को बढ़ाने की मांग कर रहा था।
रुपये को लेकर RBI का स्पष्ट संदेश
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के साथ RBI ने रुपये की स्थिरता को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI किसी विशेष विनिमय दर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता। रुपये की कीमत बाजार की ताकतें तय करती हैं। हालांकि, यदि अत्यधिक उतार-चढ़ाव, सट्टेबाजी या वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार में अव्यवस्था पैदा होती है तो RBI हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है और RBI के पास ऐसे हालात से निपटने के लिए पर्याप्त नियामकीय और बाजार आधारित उपाय हैं।
