Money Exchange Rules:विदेशी मुद्रा से संबंधित सेवाओं की सुविधा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक नई पहल की है। मनी चेंजिंग को तर्कसंगत बनाने के लिए आरबीआई एक नया मसौदा लेकर आया है। इसके तहत मनी एक्सचेंज की एक नई कैटेगरी प्रस्तावित की गई है । जो कैटेगरी-I और कैटेगरी-II अधिकृत डीलरों के एजेंसी मॉडल के माध्यम से मनी एक्सचेंज का व्यवसाय कर करेंगे। ऐसी कारोबारियों को आरबीआई से लाइसेंस की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके पहले फेमा, 1999 के तहत अधिकृत व्यक्तियों (एपी) को लाइसेंस देने कीसमीक्षा मार्च 2006 में की गई थी।
विदेशी मुद्रा लेने-देने होगा आसान
आरबीआई क्यों कर रहा है बदलाव
आरबीआई ने कहा कि मौजूदा लाइसेंसिंग ढांचे की समीक्षा का मकसद बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करना, उचित जांच और संतुलन बनाए रखते हुए आम व्यक्तियों, पर्यटकों और व्यवसायों को विदेशी मुद्रा सेवाओं को आसान करना है। इसके पहले आखिरी बार फेमा, 1999 के तहत अधिकृत व्यक्तियों (एपी) को लाइसेंस देने कीकी समीक्षा मार्च 2006 में की गई थी। आरबीआई ने कहा कि फेमा के तहत उदारीकरण, वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के एकीकरण, भुगतान प्रणालियों के डिजिटलीकरण और पिछले दो दशकों में विकसित संस्थागत संरचना को ध्यान में रखते हुए, अधिकृत करने के लिए लाइसेंसिंग ढांचे को तर्कसंगत और सरल बनाने का निर्णय लिया गया है।आरबीआई ने 31 जनवरी, 2024 तक सभी हितधारकों से मसौदा ढांचे पर प्रतिक्रिया देने को कहा है।
परमानेंट लाइसेंस
नियामक बोझ को कम करने और व्यापार करने में आसानी के लिए, आरबीआई ने कैटेगरी- II के रूप में मौजूदा प्राधिकरण को स्थायी आधार पर नवीनीकृत करने का प्रस्ताव दिया है। अधिकृत डीलर कैटेगी- II वे हैं जो केवाईसी/एएमएल/सीएफटी आवश्यकताओं के पालन के अधीन, विदेश में निजी/व्यावसायिक यात्राओं पर यात्रा करने वाले निवासियों को विदेशी मुद्रा प्री-पेड कार्ड जारी कर सकते हैं। हालांकि, विदेशी मुद्रा प्री-पेड कार्डों के संबंध में निपटान एडी श्रेणी-I बैंकों के माध्यम से किया जाना है।
