Petrol Diesel Price Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में चल रहा संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह बात स्विट्जरलैंड में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान कही। गवर्नर ने बताया कि सरकार अभी तक ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन हालात ज्यादा बिगड़ने पर आम लोगों पर इसका असर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संकट से हिला भारत: पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा (तस्वीर-istock)
तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ा असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अलग-अलग देशों तक पहुंचाया जाता है। लेकिन तनाव और संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति में बाधा आने लगी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है और ऊर्जा महंगी हो गई है।
भारत पर क्यों बढ़ रही चिंता
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। खासतौर पर तेल, गैस और उर्वरकों के मामले में भारत काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर सप्लाई प्रभावित होती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत पर उसका असर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, अगर यह संकट जल्दी खत्म नहीं हुआ तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूलना पड़ सकता है। यानी आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ समय की बात है।
सरकार अभी तक कीमतें बढ़ाने से बच रही
गौरतलब है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि आम लोगों पर महंगाई का ज्यादा बोझ न पड़े। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहती है, तो सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। ऐसे में कीमतों में बदलाव करना सरकार की मजबूरी बन सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से की अपील
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए देशवासियों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने लोगों से ईंधन का सोच-समझकर इस्तेमाल करने को कहा है ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। इसके अलावा उन्होंने फिलहाल सोने की खरीद कम करने और विदेश यात्रा टालने जैसे कदम अपनाने की सलाह भी दी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के कदमों से देश पर आर्थिक दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
रुपये में आई भारी गिरावट
पश्चिम एशिया संकट का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दे रहा है। रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 95 के नीचे पहुंच गई है। रुपये की गिरावट से आयात और महंगा हो जाता है, क्योंकि भारत को विदेशों से तेल और दूसरी जरूरी चीजें खरीदने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो महंगाई और बढ़ सकती है। इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और आरबीआई दोनों स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
