Rare earth magnets Manufacturing Scheme : भारत को दुर्लभ खनिज चुंबक (Rare Earth Permanent Magnets - REPM) के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की 7,280 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा आमंत्रित की गई वैश्विक निविदा (Global Tender) के तहत कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी देश की टॉप कंपनियों समेत कुल 20 दिग्गजों ने अपनी बोलियां जमा की हैं। मंत्रालय द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर 13 अगस्त को बोलीदाताओं की उपस्थिति में इन सभी तकनीकी बोलियों को खोला गया। इस योजना में हिस्सा लेने वाली अन्य प्रमुख कंपनियों और ज्वाइंट वेंचर में एटेरो रीसाइक्लिंग, 20 माइक्रॉन्स, लोहुम मैग्नेट्स, रिन्यू प्राइवेट लिमिटेड, बारुपऑन-आईआरपी कंसोर्टियम, जय फी सिलेंडर्स और सिंगापुर की नियो परफॉर्मेंस मैटेरियल्स शामिल हैं। इनके अलावा प्रोजील ग्रीन एनर्जी, प्रोटेरियल (इंडिया), नेक्सॉन जियोकेम, पीआरएनडी मेटल और शंकरनारायण कंस्ट्रक्शंस जैसी कंपनियों ने भी इस रेस में अपनी जगह बनाई है।
देश में बनेंगे दुनिया के सबसे ताकतवर चुंबक! 7280 करोड़ की योजना में 20 दिग्गज कंपनियां आमने-सामने
5 बड़ी कंपनियों को मिलेगा मौका
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यह भारत में अपनी तरह की पहली योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के भीतर हर साल कुल 6,000 टन क्षमता वाली एकीकृत दुर्लभ खनिज स्थायी चुंबक निर्माण इकाइयां स्थापित करना है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से इस कुल उत्पादन क्षमता को अधिकतम 5 सफल लाभार्थियों में बांटा जाएगा। प्रत्येक कंपनी को प्रति वर्ष अधिकतम 1,200 टन की निर्माण क्षमता आवंटित की जाएगी। यह पूरी परियोजना 7 साल की अवधि के लिए तैयार की गई है। इसमें शुरुआती 2 साल विनिर्माण प्लांट स्थापित करने (सेट-अप) के लिए दिए जाएंगे, जबकि अगले 5 वर्षों तक निर्मित चुंबक की बिक्री पर सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जाएगा।
EV और रक्षा क्षेत्र की बदलेगी तस्वीर
दुर्लभ खनिज स्थायी चुंबक (REPM) दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में गिने जाते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), पवन टर्बाइन, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में बहुत बड़े पैमाने पर होता है। वर्तमान में भारत इन चुंबकों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य नियोडिमियम-प्रेसियोडिमियम (NdPr) ऑक्साइड जैसे कच्चे माल से लेकर अंतिम तैयार चुंबक तक की पूरी सप्लाई चेन को भारत में ही विकसित करना है।
गौर हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 26 नवंबर 2025 को इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसके बाद भारी उद्योग मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को इसकी अधिसूचना जारी की थी। इस योजना के लिए 20 मार्च 2026 को आवेदन (RFP) मांगे गए थे और 12 अगस्त 2026 तक बोलियां जमा की गईं। इस घरेलू निर्माण से भारत की विदेशी निर्भरता खत्म होगी और देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा।
