Rajesh Exports ने सेबी के आरोप किए खारिज, कहा-गलतफहमी से उपजा विवाद

Rajesh Exports ने बाजार नियामक सेबी की तरफ से 15 लाख करोड़ के रेवेन्यू मिसएप्रोपिएशन के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, विवाद ने डेटा को गलत तरीके से समझना है।

Rajesh Exports SEBI Case : भारतीय शेयर बाजार के नियामक SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश में खासतौर पर कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता (Rajesh Mehta) पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर बैन लगा दिया गया है। कंपनी ने सेबी की कार्रवाई के बाद NSE की तरफ से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अपनी सफाई में कहा, -सभी घोषित रेवेन्यू सही हैं, दस्तावेज जमा कर स्थिति स्पष्ट करेंगे।

Rajesh Exports vs Sebi

राजेश एक्सपोर्ट्स ने दी सफाई

कंपनी का कहना है कि उसकी तरफ से घोषित सभी रेवेन्यू डेटा सही हैं। यह विवाद मोटे तौर पर SEBI और कंपनी के बीच "कम्युनिकेशन गैप और भ्रम" की वजह से उपजा है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए स्पष्टीकरण में कहा- सेबी के 3 जून 2026 के अंतरिम आदेश में किसी भी तरह का अंतिम प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। वह सभी जरूरी और प्रमाणित दस्तावेज सेबी को उपलब्ध करा रही है और उसे भरोसा है कि नियामक तथ्यों की समीक्षा के बाद सही निष्कर्ष पर पहुंचेगा।

सेबी ने क्या कहा?

सेबी (SEBI) ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि Rajesh Exports ने 158 अरब डॉलर यानी करीब ₹15.15 लाख करोड़ की रेवेन्यू हेराफेरी की है। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सब्सिडियरी और स्टेप-डाउन सब्सिडियरी से जुड़े लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया। नियामक के मुताबिक यह राशि उन इकाइयों के कुल रिपोर्टेड रेवेन्यू का करीब 99.8% थी, जिससे कंपनी के कारोबार की वास्तविक तस्वीर निवेशकों के सामने नहीं आ सकी।

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