Rajesh Exports SEBI Case : भारतीय शेयर बाजार के नियामक SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश में खासतौर पर कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता (Rajesh Mehta) पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर बैन लगा दिया गया है। कंपनी ने सेबी की कार्रवाई के बाद NSE की तरफ से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अपनी सफाई में कहा, -सभी घोषित रेवेन्यू सही हैं, दस्तावेज जमा कर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
राजेश एक्सपोर्ट्स ने दी सफाई
कंपनी का कहना है कि उसकी तरफ से घोषित सभी रेवेन्यू डेटा सही हैं। यह विवाद मोटे तौर पर SEBI और कंपनी के बीच "कम्युनिकेशन गैप और भ्रम" की वजह से उपजा है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दिए स्पष्टीकरण में कहा- सेबी के 3 जून 2026 के अंतरिम आदेश में किसी भी तरह का अंतिम प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। वह सभी जरूरी और प्रमाणित दस्तावेज सेबी को उपलब्ध करा रही है और उसे भरोसा है कि नियामक तथ्यों की समीक्षा के बाद सही निष्कर्ष पर पहुंचेगा।
सेबी ने क्या कहा?
सेबी (SEBI) ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि Rajesh Exports ने 158 अरब डॉलर यानी करीब ₹15.15 लाख करोड़ की रेवेन्यू हेराफेरी की है। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सब्सिडियरी और स्टेप-डाउन सब्सिडियरी से जुड़े लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया। नियामक के मुताबिक यह राशि उन इकाइयों के कुल रिपोर्टेड रेवेन्यू का करीब 99.8% थी, जिससे कंपनी के कारोबार की वास्तविक तस्वीर निवेशकों के सामने नहीं आ सकी।
सेबी के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स की 97% से 99% कंसोलिडेटेड इनकम विदेशी इकाइयों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित Valcambi SA से आती दिखाई गई है। लेकिन, कंपनी ने इन इकाइयों के वित्तीय विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए। वहीं, वैलकैम्बी के ऑडिटेड खातों में FY21-FY24 के दौरान केवल ₹12,557 करोड़ का स्टैंडअलोन रेवेन्यू दर्ज था।
फंड डायवर्जन का भी आरोप
सेबी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कंपनी ने Affluence Shares and Stocks Private Limited के साथ ₹11,487 करोड़ की बिक्री और ₹11,488 करोड़ की खरीद दर्ज की थी। हालांकि, संबंधित कंपनी ने ऐसे किसी भी लेनदेन से इनकार किया है। नियामक का आरोप है कि इन एंट्रीज का इस्तेमाल कारोबार का आकार कृत्रिम रूप से बड़ा दिखाने के लिए किया गया। इसके अलावा सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी के 339 करोड़ रुपये कंपनी के प्रमोटर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश मेहता के व्यक्तिगत खातों में भेजे गए, जिनका इस्तेमाल डेरिवेटिव ट्रेडिंग में हुआ। यह ट्रांजैक्शन बोर्ड और ऑडिट कमेटी की मंजूरी के बिना किए गए। कुल मिलाकर ₹926 करोड़ की राशि कथित तौर पर उचित मंजूरी और संबंधित पक्ष खुलासों के बिना ट्रांसफर की गई।
निवेशकों की संपत्ति को ₹12,726 करोड़ का नुकसान!
सेबी का अनुमान है कि कथित वित्तीय गड़बड़ी और फंड डायवर्जन की वजह से शेयरधारकों की करीब ₹12,726 करोड़ की संपत्ति प्रभावित हुई। इसमें बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक भी शामिल हैं। सेबी की कार्रवाई के बाद निवेशकों में भारी घबराहट देखने को मिली। गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5% गिरकर ₹103.92 पर लोअर सर्किट में पहुंच गया।
