Indigo Success Story: भारतीय एयरलाइन सेक्टर में कई कंपनियां आईं। कुछ बंद हो गईं और कुछ आज भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इस सेक्टर में एयर इंडिया (Air India) और इंडिगो (Indigo) ने जो पहचान बनाई है, वो कोई तीसरी एयरलाइन नहीं बना पाई। मगर एयर इंडिया, जिसे सरकार को बेचना पड़ा, के मुकाबले इंडिगो ने ज्यादा कामयाबी हासिल की। ये आज देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है और अच्छे-खासे मुनाफे में है। इसे इस कामयाबी तक किसने पहुंचाया आगे जानिए।
इंडिगो को राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने शुरू किया था
किसने किया शुरू
इंडिगो, जिसकी पैरेंट कंपनी इंटरग्लोव एविएशन है, को राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने शुरू किया था। बता दें कि उससे पहले 1988 में राहुल अपने पिता की एयरलाइन टिकट एजेंसी 'दिल्ली एक्सप्रेस' से जुड़े हुए थे। उसके बाद उन्होंने इंटरग्लोब ग्रुप की शुरुआत की।
राहुल को थी राकेश की जरूरत
वहीं राकेश गंगवाल यूएस की यूनाइटेड एयरलाइंस में काम करते थे और तब इंटरग्लोब भारत में जनरल उसकी सेल्स एजेंट थी। वैसे तो इंडिगो राहुल का सपना था, मगर उन्हें राकेश की जरूरत थी। दरअसल वे कई देशों की एयरलाइन में काम कर चुके थे। यानी उनका अनुभव राहुल के लिए काम का था।
2004 में इंडिगो को एयरलाइन लाइसेंस मिल गया और राहुल ने इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत की।
इंडिगो से नहीं जुड़ना चाहते थे राकेश
राहुल राकेश का साथ चाहते थे। मगर राकेश भारत में एयरलाइन सेक्टर की स्थिति के कारण इंडिगो में शामिल नहीं होना चाहते थे। हालांकि आखिर में राहुल के काफी समझाने के बाद राकेश एयरलाइन कंपनी से जुड़ गए। 2006 में इंडिगो ने फ्लाइट उड़ानी शुरू की, जो जुलाई 2023 में 63.4 फीसदी से मार्केट शेयर के साथ देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है।
500 प्लेन खरीदने की तैयारी
कुछ समय पहले इंडिगो ने एयरबस के साथ 500 प्लेन खरीदने की डील का ऐलान किया था। ये इस सेक्टर के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
कितना है मार्केट शेयर
इंडिगो के मुकाबले टाटा ग्रुप की विस्तारा और एयर इंडिया का मिलाकर भी मार्केट शेयर जुलाई में 25.8 फीसदी रहा था। बता दें कि 2019 में राकेश ने राहुल से अनबन के बाद 95,772 करोड़ रु की मार्केट कैपिटल इंडिगो से बाहर निकलने का ऐलान किया था। वे अपनी काफी हिस्सेदारी बेच भी चुके हैं।
