भारत में सुरक्षित निवेश और टैक्स बचत के लिए 'पब्लिक प्रोविडेंट फंड' यानी पीपीएफ (PPF) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। मिडिल क्लास के करोड़ों लोग अपनी रिटायरमेंट की प्लानिंग इसी स्कीम के भरोसे करते हैं। हाल ही में सरकार ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा की है। ऐसे में पीपीएफ खाताधारकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी हुई है या दरें पुरानी वाली ही बनी रहेंगी? आइए जानते हैं सरकार के ताजा फैसले और आपके पीपीएफ खाते पर पड़ने वाले इसके असर के बारे में।
क्या रही इस बार की ब्याज दर?
सरकार ने घोषणा की है कि पीपीएफ (PPF) पर मिलने वाली ब्याज दर को फिलहाल स्थिर रखा गया है। मौजूदा समय में पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि बढ़ती महंगाई और अन्य सरकारी बॉन्ड यील्ड को देखते हुए सरकार इस बार ब्याज दरों में 0.10 से 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है, लेकिन फिलहाल इसे यथावत रखने का फैसला लिया गया है। यह दर बैंक की एफडी (FD) और अन्य बचत खातों के मुकाबले अभी भी काफी आकर्षक मानी जाती है, खासकर तब जब इसमें मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।
आपके खाते में कब और कैसे आता है ब्याज?
पीपीएफ खाते की सबसे खास बात इसकी ब्याज गणना (Interest Calculation) का तरीका है। पीपीएफ पर ब्याज की गणना मंथली आधार पर की जाती है, लेकिन यह आपके खाते में साल में केवल एक बार 31 मार्च को क्रेडिट किया जाता है। नियम के अनुसार, हर महीने की 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच जो न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) आपके खाते में होता है, उसी पर उस महीने का ब्याज कैलकुलेट होता है। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह होती है कि अधिकतम लाभ पाने के लिए आपको हर महीने की 5 तारीख से पहले ही अपना निवेश जमा कर देना चाहिए।
कितना पैसा आएगा आपके अकाउंट में?
पीपीएफ में आप एक वित्त वर्ष में न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा कर सकते हैं। मान लीजिए कि आपने पूरे साल में ₹1.5 लाख का निवेश किया है और ब्याज दर 7.1% है, तो कंपाउंडिंग (Compound Interest) के जादू के कारण आपका पैसा तेजी से बढ़ता है। चूंकि इसमें 'E-E-E' (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी का लाभ मिलता है, इसलिए न तो आपके निवेश पर, न ब्याज पर और न ही मैच्योरिटी की राशि पर कोई टैक्स देना पड़ता है। 15 साल की मैच्योरिटी अवधि के बाद, यह छोटी-छोटी बचत एक बड़े फंड के रूप में आपके सामने आती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
भले ही ब्याज दरें इस तिमाही में नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पीपीएफ अभी भी लंबी अवधि के लिए एक बेहतरीन 'रिस्क-फ्री' निवेश है। यदि आप अपनी रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित कोष बनाना चाहते हैं, तो पीपीएफ को अपनी पोर्टफोलियो में जरूर शामिल रखें। सरकार हर तीन महीने में इन दरों की समीक्षा करती है, इसलिए अगली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अभी भी बनी हुई है। खाताधारकों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से अपना योगदान जारी रखें ताकि उन्हें भविष्य में चक्रवृद्धि ब्याज का पूरा फायदा मिल सके।
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