Property Buying Tips : भारत में घर या संपत्ति खरीदना ज्यादातर लोगों के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई खरीदार सिर्फ कीमत, लोकेशन और बैंक लोन पर ध्यान देते हैं, जबकि असली जोखिम कानूनी दस्तावेजों और एग्रीमेंट में छिपा होता है। अगर इन दस्तावेजों की सही जांच नहीं की जाए, तो भविष्य में कानूनी विवाद, आर्थिक नुकसान और यहां तक कि संपत्ति बेचना भी मुश्किल हो सकता है।
घर खरीदने से पहले सावधान: दस्तावेजों की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए जरूरी कानूनी जांच
एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट और म्यूटेशन रिकॉर्ड क्यों जरूरी?
किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले Encumbrance Certificate (EC) और Mutation Register Extract की जांच बेहद जरूरी होती है। यह दस्तावेज बताते हैं कि संपत्ति पर कोई कर्ज, कोर्ट केस या अन्य कानूनी बंधन तो नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कम से कम 30 साल का रिकॉर्ड देखना चाहिए ताकि किसी भी पुराने विवाद या छिपे हुए दावे का पता चल सके।
प्रॉपर्टी टैक्स और सरकारी रिकॉर्ड की जांच
खरीदार को यह (Real Estate News) भी देखना चाहिए कि संपत्ति पर कोई बकाया प्रॉपर्टी टैक्स तो नहीं है। खासकर कमर्शियल प्रॉपर्टी में यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां टैक्स की राशि अधिक हो सकती है। साथ ही Khaata Extract, Khaata Certificate और E-Khaata जैसे दस्तावेज केवल रिकॉर्ड बताते हैं, लेकिन यह मालिकाना हक का प्रमाण नहीं होते।
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मदर डीड और सेल डीड की पूरी जांच जरूरी
संपत्ति की कानूनी वैधता समझने के लिए Mother Deed और सभी Sale Deeds की जांच करना जरूरी है। मदर डीड संपत्ति के मूल मालिक और ट्रांसफर का रिकॉर्ड बताती है। अगर इसमें कोई गलती या अधूरी जानकारी है, तो भविष्य में मालिकाना हक को लेकर विवाद हो सकता है। इसी तरह सभी सेल डीड्स का क्रम सही होना चाहिए, वरना टाइटल चेन टूट सकती है।
जॉइंट डेवलपमेंट और पावर ऑफ अटॉर्नी की भूमिका
अगर संपत्ति किसी Joint Development Agreement के तहत बनी है, तो यह समझना जरूरी है कि डेवलपर और जमीन मालिक के बीच अधिकार कैसे बांटे गए हैं। इसके अलावा General Power of Attorney (GPA) की वैधता और रजिस्ट्रेशन की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई मामलों में इसी दस्तावेज के आधार पर संपत्ति ट्रांसफर होती है।
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और कानूनी कब्जा
Occupancy Certificate यह साबित करता है कि इमारत सभी नियमों के अनुसार बनी है और रहने के लिए सुरक्षित है। इसके बिना रहने वाले लोगों को बिजली, पानी और अन्य सेवाओं में परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही Deed of Declaration जैसे दस्तावेज कॉमन एरिया और सोसाइटी के नियम तय करते हैं।
एग्रीमेंट में छिपे जोखिम और बातचीत की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे बड़ा जोखिम बिल्डर-बायर एग्रीमेंट में होता है। अक्सर इसमें बिल्डर को देरी करने पर कम सजा और खरीदार को देरी पर भारी ब्याज का प्रावधान होता है। इसे असंतुलित बताया गया है। इसलिए दोनों पक्षों के लिए समान पेनल्टी क्लॉज होना जरूरी है। साथ ही विवाद की स्थिति में खरीदार के पास Consumer Court और NCLT जैसे कानूनी विकल्प भी होते हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
संपत्ति खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जागरूक खरीदार ही भविष्य के कानूनी और वित्तीय जोखिमों से बच सकता है। घर खरीदना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि एक लंबी कानूनी जिम्मेदारी भी है, जिसे समझदारी से निभाना जरूरी है।
