Petrol-Diesel Price Hike: देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। ये नई कीमतें आज शनिवार से लागू हो गई हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतों के कारण लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी (तस्वीर-istock)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव के बाद फैसला
ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बढ़ती कीमतों के चलते फ्यूल रिटेलर्स पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया है। नायरा एनर्जी ने इसी दबाव को कम करने के लिए कीमतों में यह बदलाव किया है। कंपनी ने हाल के महीनों में अंतरष्ट्रीय स्तर पर आए उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल वजहों से सप्लाई में आई रुकावटों को देखते हुए यह कदम उठाया है।
पहले भी बढ़ाए थे दाम, फिर घटाए
यह पहला मौका नहीं है जब नायरा ने बाजार के हिसाब से कीमतें बदली हों। इससे पहले जब ईरान संकट के दौरान क्रूड ऑयल महंगा हुआ था, तब भी नायरा ने 26 मार्च को पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा किया था। इसके बाद जुलाई महीने में जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम थोड़े कम हुए, तो कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता करके ग्राहकों को राहत दी थी। लेकिन अब कच्चे तेल के फिर से महंगे होने पर कंपनी ने पुरानी दरें लागू कर दी हैं।
सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों और प्राइवेट का अंतर
भारत में इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों के पास करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। यह कंपनियां अक्सर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिटेल कीमतें स्थिर रखने की कोशिश करती हैं। वहीं, नायरा और जियो-बीपी (Jio-bp) जैसी प्राइवेट कंपनियां अपनी लागत के हिसाब से कीमतें घटाती-बढ़ाती रहती हैं। जियो-बीपी ने फिलहाल अपनी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
कंपनियों को भारी नुकसान और सरकार का निर्देश
रेटिंग एजेंसी ICRA की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद रिटेल कीमतें न बढ़ाने से तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹8 और डीजल पर ₹9 प्रति लीटर का नुकसान झेलना पड़ रहा था। सरकारी व प्राइवेट रिटेलर्स को मिलाकर हर दिन सैकड़ों करोड़ का घाटा हो रहा था। इस घाटे से बचने के लिए कुछ प्राइवेट पंपों ने बिक्री सीमित करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद 1 अक्टूबर को सरकार ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा था कि कोई भी प्राइवेट पंप बिक्री पर सीमा नहीं लगाएगा।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
नायरा द्वारा दाम बढ़ाए जाने के बाद अब सरकारी और प्राइवेट पेट्रोल पंपों की दरों में अंतर आ जाएगा। अगर सरकारी कंपनियां भी आने वाले दिनों में कीमतें बढ़ाती हैं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई, ट्रांसपोर्टेशन और आम जनता के बजट पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। लेकिन दूसरी तरफ, यदि कंपनियां कीमतें नहीं बढ़ाती हैं, तो उन्हें भारी घाटा सहना पड़ेगा।
