क्या आप भी बच्चे के नाम पर खुलवा रहे हैं Kids Bank Account? जान लें वो नियम जो बैंक वाले अक्सर नहीं बताते

अगर आप भी अपने बच्चे का बैंक अकाउंट खुलवाने जा रहे है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। बैंक अकाउंट को लेकर ऐसी कई जानकारी होती है जो अक्सर बैंक वाले भी नहीं बताते हैं।

आजकल बच्चों के बेहतर भविष्य और उन्हें बचत की आदत सिखाने के लिए माता-पिता सबसे पहले उनका Kids Bank Account खुलवाते हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अधिकांश पेरेंट्स को खाते से जुड़े उन तकनीकी नियमों की जानकारी नहीं होती जो भविष्य में उनकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बच्चों के नाम पर जमा राशि और उस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता। असल में, आयकर विभाग का 'क्लबिंग ऑफ इनकम' (Clubbing of Income) नियम यहां लागू होता है। इस नियम के तहत, एक नाबालिग बच्चे के बैंक खाते से मिलने वाले ब्याज को उसके माता-पिता की आय में जोड़ दिया जाता है। इसका मतलब है कि अगर बच्चे के खाते में बड़ी रकम जमा है और उस पर अच्छा ब्याज मिल रहा है, तो उस ब्याज पर टैक्स का भुगतान आपको अपनी इनकम स्लैब के हिसाब से करना होगा। आमतौर पर, माता-पिता में से जिसकी सालाना आय अधिक होती है, बच्चे की कमाई को उसी की आय में जोड़कर टैक्स वसूला जाता है।

children bank account

बैंक वाले भी नहीं बताते ये बात

खाते के संचालन यानी कंट्रोल की बात करें, तो जब तक बच्चा 10 साल से कम उम्र का होता है, तब तक माता-पिता या गार्जियन ही पूरे अकाउंट को मैनेज करते हैं। लेकिन जैसे ही बच्चा 10 साल का हो जाता है, कई बैंक उसे खाता चलाने की सीमित आजादी दे देते हैं। इसमें बच्चे को उसके नाम का डेबिट कार्ड और पासबुक मिल सकती है, जिससे वह छोटी-मोटी खरीदारी या पैसे निकालने का अनुभव ले सके। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से बैंक इन खातों से पैसे निकालने की एक सख्त सीमा (Limit) तय करते हैं, ताकि पैसों का गलत इस्तेमाल न हो सके। माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भले ही वे बच्चे के खाते से पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर वह पैसा बच्चे के कल्याण और उसकी जरूरतों के लिए ही खर्च होना चाहिए।

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