पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई 'आग' ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की कमर तोड़ दी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज कंपनियों को पेट्रोल डीजल (Petrol-Diesel) पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. डीजल की बिक्री पर ₹100 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹20 प्रति लीटर का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। यह स्थिति पिछले एक साल में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल का नतीजा है, जो $70 प्रति बैरल से बढ़कर अब $105 प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है।
कितना हो रहा नुकसान?
भले ही तकनीकी रूप से भारत में तेल की कीमतें बाजार आधारित हैं, लेकिन जनहित को देखते हुए इन्हें काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है। अगर आज ये कंपनियां असली लागत और मुनाफे के साथ ईंधन बेचतीं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही होतीं। उदाहरण के लिए, दिल्ली में जो पेट्रोल अभी लगभग ₹94.77 प्रति लीटर मिल रहा है, उसकी वास्तविक कीमत ₹114.77 होनी चाहिए। सबसे डराने वाला आंकड़ा डीजल का है, जिसकी मौजूदा कीमत ₹87.67 है, लेकिन बिना सब्सिडी के यह ₹187.67 प्रति लीटर बिकता। सरकार और तेल कंपनियां इस भारी वित्तीय बोझ को खुद सहकर आम आदमी को महंगाई की सीधी मार से बचा रही हैं।
दाम बढ़ने की अफवाह
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह खबर तेजी से फैल रही थी कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम ₹25 से ₹28 तक बढ़ सकते हैं। इस खबर ने आम जनता के बीच घबराहट पैदा कर दी थी। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कीमतों में ऐसी किसी बड़ी बढ़ोतरी का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक और डराने वाली खबरों पर विश्वास न करें।
सरकार ने राहत देने के लिए क्या किया?
तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे और जनता की जेब का ख्याल रखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में कई बड़े कदम उठाए हैं। महीनेभर पहले ही पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की गई थी, ताकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते दामों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े। इसके अलावा, देश के भीतर ईंधन की कमी न हो, इसके लिए डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। सरकार कच्चे तेल उत्पादकों पर 'विंडफॉल टैक्स' लगाकर भी राजस्व को संतुलित करने की कोशिश कर रही है, ताकि तेल कंपनियों के घाटे की कुछ हद तक भरपाई की जा सके।
