डीजल पर 100 और पेट्रोल पर 20 रुपए प्रति लीटर हो रहा है नुकसान, कच्चे तेल की आग में जल रही हैं तेल कंपनियां

कच्चे तेल की कीमतों की सप्लाई प्रभावित होने से OMCs को डीजल पर ₹100 और पेट्रोल पर ₹20 प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई 'आग' ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की कमर तोड़ दी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज कंपनियों को पेट्रोल डीजल (Petrol-Diesel) पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. डीजल की बिक्री पर ₹100 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹20 प्रति लीटर का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। यह स्थिति पिछले एक साल में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल का नतीजा है, जो $70 प्रति बैरल से बढ़कर अब $105 प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है।

Petrol Diesel

कितना हो रहा नुकसान?

भले ही तकनीकी रूप से भारत में तेल की कीमतें बाजार आधारित हैं, लेकिन जनहित को देखते हुए इन्हें काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है। अगर आज ये कंपनियां असली लागत और मुनाफे के साथ ईंधन बेचतीं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही होतीं। उदाहरण के लिए, दिल्ली में जो पेट्रोल अभी लगभग ₹94.77 प्रति लीटर मिल रहा है, उसकी वास्तविक कीमत ₹114.77 होनी चाहिए। सबसे डराने वाला आंकड़ा डीजल का है, जिसकी मौजूदा कीमत ₹87.67 है, लेकिन बिना सब्सिडी के यह ₹187.67 प्रति लीटर बिकता। सरकार और तेल कंपनियां इस भारी वित्तीय बोझ को खुद सहकर आम आदमी को महंगाई की सीधी मार से बचा रही हैं।

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