पेट्रोल पर 5, डीजल पर 4 और LPG पर 650 रुपए का घाटा! क्यों कम नहीं हो रहा तेल कंपनियों का नुकसान?

देश में 4 बार पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ने के बावजूद भी तेल कंपनियों का घाटा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर प्रति लीटर 5 रुपए, डीजल पर 4 रुपए प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर पूरे 650 रुपए का भारी-भरकम घाटा हो रहा है।

भारत में आम जनता के लिए पेट्रोल, डीजल (Petrol Diesel) और रसोई गैस (LPG) की कीमतें हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही हैं। पिछले कुछ समय से भले ही आपको अपने शहर में ईंधन के दाम मामूली बढे हों, लेकिन परदे के पीछे सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) की हालत पतली होती जा रही है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर प्रति लीटर 5 रुपए, डीजल पर 4 रुपए प्रति लीटर और घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर पूरे 650 रुपए का भारी-भरकम घाटा हो रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद बाजार में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में आम आदमी को एक बार फिर महंगाई का तगड़ा झटका लगने वाला है।

Petrol Diesel Reserve

क्यों कम नहीं हो रहा नुकसान?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर तेल कंपनियों का यह नुकसान कम क्यों नहीं हो रहा है? इसका सबसे बड़ा और सीधा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार हो रहा उतार-चढ़ाव है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और दुनिया भर में चल रहे युद्ध या संघर्षों की वजह से सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च भी काफी बढ़ गया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें न बढ़ने से कंपनियों का अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य का अंतर) का आंकड़ा लगातार बड़ा होता जा रहा है।

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