OMC Profit : देश की सरकारी तेल कंपनियों के लिए सितंबर तिमाही कमाई के लिहाज से बेहद शानदार रही। पेट्रोल-डीजल और LPG जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्ट बेचने से लेकर कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने वाली तीन सरकारी कंपनियों ने महज 3 महीने में ₹30,106 करोड़ का मुनाफा कमाया है।
तेल कंपनियों के मुनाफे में उछाल
इन कंपनियों की 3 महीने में हुई कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीनों कंपनियों ने सितंबर तिमाही में ही वित्त वर्ष 2026 के पूरे साल के संयुक्त मुनाफे का करीब 39% कमा लिया। FY26 में इनका कुल मुनाफा ₹77,281 करोड़ रहा था।
घाटे से मुनाफे में आईं कंपनियां
सबसे खास बात यह है कि जून तिमाही में भारी घाटा उठाने के बाद तीनों कंपनियों ने सितंबर तिमाही में जबरदस्त वापसी की है। हालांकि, यह कमाई केवल पेट्रोल-डीजल की बिक्री का नतीजा नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में अनुकूल बदलाव और रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल व गैस कारोबार से मिले बेहतर मार्जिन ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
किस कंपनी ने कितनी कमाई की
सरकारी तेल कंपनियों की इस कमाई में सबसे बड़ा योगदान देश की सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) का रहा। IOC ने सितंबर तिमाही में ₹21,630 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया।
हालांकि, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.5% घटकर ₹4,993 करोड़ रहा। पिछले साल की सितंबर तिमाही में कंपनी ने ₹6,443 करोड़ का मुनाफा कमाया था। वहीं, जून तिमाही में BPCL को ₹3,962 करोड़ का घाटा हुआ था।
इसी तरह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) का नेट प्रॉफिट भी 9.1% घटकर ₹3,483 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,830 करोड़ था। हालांकि, जून तिमाही में करीब ₹11,526 करोड़ के भारी घाटे के बाद कंपनी ने शानदार रिकवरी की है।
महंगा क्रूड फिर कैसे बढ़ा मुनाफा?
सितंबर तिमाही में तेल कंपनियों की कमाई बढ़ने की एक बड़ी वजह रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार भी रहा। ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) से पता चलता है HPCL का GRM पिछले साल की समान तिमाही के $8.80 प्रति बैरल से बढ़कर $32.15 प्रति बैरल हो गया। इसी तरह दूसरी कंपनियों का मार्जिन भी बढ़ा है।
₹5.60 लाख करोड़ का कारोबार
मुनाफे के साथ तीनों सरकारी तेल कंपनियों के रेवेन्यू में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। सितंबर तिमाही में इनका संयुक्त रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस करीब 29% बढ़कर ₹5.60 लाख करोड़ पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹4.35 लाख करोड़ था।
LPG के मोर्चे पर अब भी दबाव
रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों के सामने कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। 30 सितंबर, 2026 तक IOC का LPG प्राइसिंग बफर ₹32,505.69 करोड़ की अंडर रिकवरी दिखा रहा है।
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