पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ने से तेल कंपनियों को 30000 करोड़ का हर महीने नुकसान

होर्मुज संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उबाल का असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर साफ़ देखने को मिल रहा है। Petrol Diesel की कीमतें न बढ़ने से तेल कंपनियों को रोजाना 1000 करोड़ और हर महीने 30000 करोड़ का नुकसान हो रहा है.

Petrol Diesel price: पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए यह राहत की खबर है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (Oil companies) जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कीमतों को स्थिर रखने के कारण इन कंपनियों को हर दिन ₹700 से ₹1,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो मासिक आधार पर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच जाता है।

Petrol Diesel Loss

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत जो दो महीने पहले लगभग $70 प्रति बैरल थी, वह तनाव बढ़ने के कारण बढ़कर $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बीच में तो यह कीमतें $144 प्रति बैरल तक भी गई थीं, हालांकि अब यह $100 के आसपास कारोबार कर रही हैं। लागत और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच इस बढ़ते अंतर के कारण अप्रैल के महीने में पेट्रोल पर करीब ₹18 प्रति लीटर और डीजल पर ₹25 प्रति लीटर तक का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।

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