New Gratuity Rules 2026: नए महीने की शुरुआत के साथ अब नौकरी करने वाले लोगों के लिए ग्रेच्युटी की परिभाषा बदल चुकी है। पिछले साल पेश नए लेबर कोड्स के तहत अब भारतीय कर्मचारियों को ग्रेच्युटी की अधिक राशि मिल सकती है।
बदल गया Gratuity का गणित (Photo: iStock)
ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन
नए स्ट्रक्चर के अनुसार, अब ग्रेच्युटी की गणना के लिए वेतन में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस शामिल होंगे और इनका कुल योग कर्मचारी के कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है। नए ग्रेच्युटी नियमों के बाद कर्मचारियों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा ग्रेच्युटी मिल सकती है। आसान भाषा में समझें तो पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं (जैसे CTC का 30%) और बाकी पैसा अलग-अलग भत्तों में देती थीं, जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी। अब नए नियम के अनुसार वेतन (बेसिक + DA आदि) को CTC का कम से कम 50% रखना से ग्रेच्युटी का आधार बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर पहले किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी 1.44 लाख रुपए बनती थी, तो नए नियम के बाद वही बढ़कर करीब 2 लाख रुपए से ज्यादा हो सकती है।
टेक-होम सैलरी और PF पर असर
नए ग्रेच्युटी नियमों का असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और PF दोनों पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, जहां एक ओर इससे लंबे समय में रिटायरमेंट बेनिफिट्स बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर कंपनियों पर वित्तीय बोझ (DBO) भी बढ़ेगा। क्योंकि PF का योगदान भी वेतन (बेसिक) पर आधारित होता है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने पर PF योगदान भी बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों की मासिक टेक-होम सैलरी कम हो सकती है। हालांकि, अगर पहले से ही PF 12% बेसिक सैलरी (जैसे 50,000) पर दिया जा रहा है, तो इसमें ज्यादा बदलाव नहीं होगा। अगर CTC समान रहता है तो हाथ में मिलने वाली सैलरी घट सकती है, लेकिन लंबे समय में रिटायरमेंट सेविंग्स मजबूत होंगी।
ग्रेच्युटी के लिए पात्रता
Code on Social Security 2020 के तहत पात्रता (eligibility) के नियमों का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसके अनुसार, जहां नियमित कर्मचारियों को आमतौर पर ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की सेवा पूरी करनी होती है, वहीं अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को केवल 1 साल की सेवा पूरी करने के बाद ही प्रोराटा आधार पर ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, अधिनियम के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए, अंतिम वर्ष में 6 महीने से अधिक की सेवा अवधि को ग्रेच्युटी की गणना के लिए पूरे एक वर्ष के रूप में माना जाता है।
