अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ गई है, तो पर्सनल लोन लेने से पहले अपने पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF खाते के बारे में जरूर जान लें। PPF को आमतौर पर लंबी अवधि की बचत और निवेश के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें जमा रकम के आधार पर लोन लेने की सुविधा भी मिलती है। इसका फायदा यह है कि आपको अपनी जरूरत पूरी करने के लिए तुरंत किसी महंगे कर्ज का सहारा नहीं लेना पड़ सकता। हालांकि, यह सुविधा हर PPF खाताधारक को हर समय नहीं मिलती। इसके लिए कुछ नियम और शर्तें तय हैं।
PPF खाते पर कब मिल सकता है लोन?
PPF खाते पर लोन लेने की सुविधा खाता खोलने के बाद तीसरे वित्त वर्ष से छठे वित्त वर्ष के अंत तक मिलती है। यानी खाता खुलने के तुरंत बाद आप लोन नहीं ले सकते। अगर आपका खाता इस अवधि में आता है, तो आप अपनी पात्रता के हिसाब से आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आम तौर पर सातवें वित्त वर्ष से नियमों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिल सकती है। इसलिए लोन लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपका खाता कितने साल पुराना है।
कितना पैसा मिल सकता है?
PPF खाते में लाखों रुपये जमा होने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी रकम के बराबर लोन ले सकते हैं। नियमों के मुताबिक, लोन की अधिकतम सीमा उस वित्त वर्ष से पहले के दूसरे वित्त वर्ष के अंत में खाते में मौजूद पात्र बैलेंस का 25 प्रतिशत होती है, जिसमें आप लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर संबंधित नियमों के अनुसार आपका पात्र बैलेंस 4 लाख रुपये है, तो आपको अधिकतम 1 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। वास्तविक रकम खाते के रिकॉर्ड और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
कितना ब्याज देना होगा?
PPF लोन का एक बड़ा फायदा इसकी अपेक्षाकृत कम ब्याज लागत है। मौजूदा PPF ब्याज दर 7.1 प्रतिशत सालाना होने पर, इसके ऊपर 1 प्रतिशत जोड़कर कुल दर 8.1 प्रतिशत सालाना बनती है। हालांकि, ब्याज की गणना और भुगतान की शर्तों को समझना जरूरी है। लोन की मूल रकम अधिकतम 36 महीने में चुकानी होती है। मूल रकम चुकाने के बाद ब्याज का भुगतान दो मासिक किस्तों के भीतर करना होता है। निर्धारित समय में लोन न चुकाने पर ब्याज की शर्तें बदल सकती हैं।
लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
PPF लोन एक साल में केवल एक बार लिया जा सकता है। पहले लिया गया लोन और उसका ब्याज पूरी तरह चुकाए बिना नया लोन नहीं मिलता। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी जरूरत, आय और भुगतान की क्षमता का आकलन करें। अगर आप आसानी से रकम वापस कर सकते हैं, तो यह विकल्प उपयोगी हो सकता है। लेकिन केवल कम ब्याज देखकर लोन लेना सही नहीं है। जरूरत के हिसाब से रकम लें और भुगतान की योजना पहले तैयार करें।
