Agriculture Reforms:भारत को अगर विकसित देश बनना है तो उसके जरिए कृषि क्षेत्र को लेकर सोच बदलने की जरूरत है। नकारात्मक नजरिए से निकलकर सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने कृषि विकास का यह नया मंत्र दिया है। इसके तहत एमएसपी का भरोसा, उत्पादकता बढ़ाने पर खास तौर से फोकस करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय इकोनॉमी में कृषि क्षेत्र की 18-20 फीसदी भूमिका है। ऐसे में विकसित भारत बनने के लिए कृषि क्षेत्र को अगले 25 साल कम से कम 3.5-5 फीसदी ग्रोथ हासिल करनी होगी। ऐसा होने पर ही भारत की जीडीपी 7-8 फीसदी ग्रोथ हासिल कर पाएगी। और वह विकसित भारत बन पाएगा।
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद
ज्यादा ग्रोथ कैसे हासिल होगी
रमेश चंद ने रुरल वॉयस के एक कार्यक्रम में कहा कि ज्यादा ग्रोथ हासिल करने के लिए अवसर तलाश होने होंगे। उनके अनुसार अभी देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां पर कृषि ग्रोथ बहुत ज्यादा है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं तो 5-6 फीसदी ग्रोथ पिछले कई वर्षों से हासिल कर रहे हैं। इन राज्यों के अलावा कई ऐसे राज्य हैं, जहां इन राज्यों की तरह ग्रोथ की बेहद संभावना है, हमें उन राज्यों की ग्रोथ तेजी से बढ़ानी होगी। जिससे कि वह तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसी ग्रोथ रेट हासिल कर सकें।
उत्पादकता बढ़ाने पर फोकस
इसी तरह देश के कई राज्यों में दूध उत्पादन, फसल उत्पादन बहुत ज्यादा हो रहा है, लेकिन कई राज्यों में ऐसा नहीं है। दूध के उत्पादन से लेकर प्रति एकड़ फसल उत्पादन में बहुत अंतर है। हमें इस अंतर को खत्म करना होगा। प्रति एकड़ फसल उत्पादन को बढ़ाना होगा। इसके लिए पशुपालन में भी उत्पादकता को बढ़ाना होगा।
MSP सुनिश्चितता जरूरी
देश के कई राज्य हैं, जहां पर किसानों को बेहतर तरीके से एमएसपी मिल रही है। लेकिन कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर किसानों की फसलें एमएसपी पर नहीं बिक पा रही है। हमें इस अंतर को खत्म करने जरूरत है। क्योंकि अगर सभी राज्यों में किसानों को एमएसपी की उपलब्धता हो जाएगी। तो किसानों की इनकम बढ़ने के साछ साथ उत्पादकता भी दिखेगी।
केवल सरकार के भरोसे न रहे
रमेश चंद ने यह भी कहा कि हर बात के लिए किसान को सरकार के भरोसे नहीं होना चाहिए। सरकार के साथ-साथ किसान को भी बाजार के नए अवसर तलाशने चाहिए । ई-कॉमर्स क्षेत्र में ONDC एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां पर किसान सीधे अपनी फसलों के उचित दाम पर बेच सकते हैं। और इसमें बिचौलिये की कोई भूमिका नहीं होगी। मेरा मानना है कि यह बेहद क्रांतिकारी पहल है। किसानों को उसका फायदा उठाना चाहिए। इसी तरह किसानों को केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों से भी सवाल पूछने चाहिए। क्योंकि राज्यों की कृषि क्षेत्र में रिसर्च की भूमिका बहुत कम होती जा रही है।
