Milk Price Hike : केरलम की प्रमुख सहकारी डेयरी कंपनी Kerala Cooperative Milk Marketing Federation, जिसे आमतौर पर मिल्मा (Milma) के नाम से जाना जाता है, ने राज्य में दूध की कीमत बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 जून से दूध 4 रुपये प्रति लीटर महंगा हो जाएगा। यह फैसला बुधवार को कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में लिया गया। मिल्मा का कहना है कि पिछले कुछ समय में दूध उत्पादन, परिवहन और वितरण की लागत काफी बढ़ गई है। इसके साथ ही डेयरी किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी ने कीमत बढ़ाने का निर्णय लिया है।
केरलम में 1 जून से दूध महंगा, मिल्मा ने बढ़ाए दाम (तस्वीर-istock)
किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मिल्मा के चेयरमैन के.एस. मणि ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि दूध की कीमत में जो बढ़ोतरी की गई है, उसका सबसे बड़ा हिस्सा डेयरी किसानों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मिल्मा किसानों का संगठन है, इसलिए उनकी आय बढ़ाना सबसे जरूरी है। उन्होंने बताया कि बढ़ाए गए 4 रुपये में से 3.35 रुपये सीधे किसानों को मिलेंगे। यानी कुल बढ़ोतरी का करीीब 83.75 प्रतिशत हिस्सा किसानों के पास जाएगा। इसके अलावा डेयरी सहकारी समितियों को 25 पैसे प्रति लीटर दिए जाएंगे। बाकी हिस्सा वितरण और बिक्री व्यवस्था से जुड़े लोगों को मिलेगा।
खरीद मूल्य में भी बढ़ोतरी
नई कीमतें लागू होने के बाद किसानों से दूध खरीदने की दर भी बढ़ जाएगी। अभी किसानों को दूध के लिए 40.04 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं, लेकिन 1 जून के बाद यह बढ़कर 43.39 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। मिल्मा प्रबंधन का कहना है कि कंपनी अपने पास बहुत कम हिस्सा रख रही है और किसानों के हिस्से में कोई कटौती नहीं की गई है। कंपनी का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाना और किसानों को आर्थिक राहत देना है।
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमत?
मिल्मा के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में डेयरी क्षेत्र कई समस्याओं का सामना कर रहा है। उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है, जबकि किसानों को पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल पा रहा था। इससे कई किसान आर्थिक दबाव में आ गए थे। कंपनी ने बताया कि केरल के कई हिस्सों में इस साल भीषण गर्मी पड़ी, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन गई। इसका असर पशुओं के चारे और दूध उत्पादन पर पड़ा। गर्मी के कारण दूध उत्पादन में कमी आई और लागत बढ़ गई।
दूसरे राज्यों से खरीदना पड़ रहा दूध
मिल्मा ने यह भी कहा कि राज्य में स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्यों से दूध खरीदना पड़ रहा है। बाहर से आने वाले दूध की कीमत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। इससे कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन और वितरण खर्च भी बढ़ गए हैं। दूध को गांवों से शहरों तक पहुंचाने और बाजार में सप्लाई बनाए रखने में अब ज्यादा खर्च हो रहा है।
उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
दूध की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। घरों में रोज इस्तेमाल होने वाला दूध अब महंगा मिलेगा। इसके साथ ही चाय, कॉफी, मिठाई और डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि मिल्मा का कहना है कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया है ताकि डेयरी किसानों को नुकसान से बचाया जा सके और राज्य में दूध उत्पादन लगातार जारी रहे। कंपनी का मानना है कि अगर किसानों को उचित कीमत नहीं मिलेगी तो भविष्य में दूध उत्पादन पर और ज्यादा असर पड़ सकता है।
डेयरी क्षेत्र को बचाने की कोशिश
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती लागत और मौसम की मार के कारण डेयरी उद्योग कई चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में किसानों को बेहतर भुगतान देना जरूरी हो गया है। मिल्मा का यह फैसला किसानों को राहत देने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
