महाराष्ट्र के आम नागरिकों और परिवारों के लिए महंगाई से जुड़ा एक नया झटका सामने आया है। राज्य भर में दूध की बिक्री करने वाली प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। नई दरें लागू होने के बाद अब लोगों को रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले गाय और भैंस दोनों तरह के दूध के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट, बच्चों के पोषण खर्च और चाय-मिठाई के कारोबार से जुड़े छोटे व्यवसायियों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
आज से 2 रुपये लीटर महंगा हुआ दूध
गाय और भैंस के दूध की नई दरें
कीमतों में बदलाव के बाद महाराष्ट्र में अब गाय और भैंस के दूध के दाम अलग-अलग श्रेणियों में बढ़ गए हैं।
- भैंस का दूध (Buffalo Milk): पहले जो भैंस का दूध ₹68 से ₹70 प्रति लीटर के आसपास मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर ₹70 से ₹72 प्रति लीटर हो गई है।
- गाय का दूध (Cow Milk): वहीं, गाय के दूध की कीमत में भी ₹2 का इजाफा हुआ है, जिसके बाद अब इसका भाव ₹54 से ₹56 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।
- अलग-अलग ब्रांड्स और स्थानीय डेयरियों (जैसे अमूल, गोकुल, या मदर डेयरी) के पैकेटों पर ये दरें इलाकों के हिसाब से थोड़े अंतर के साथ लागू हो रही हैं।
आखिर क्यों बढ़ाए गए दूध के दाम?
डेयरी संघों और कंपनियों का कहना है कि दूध की कीमतों में इजाफा करना बेहद जरूरी हो गया था। इसके पीछे मुख्य रूप से कच्चे माल और चारे की बढ़ती लागत (Fodder Cost) को जिम्मेदार ठहराया गया है। पशुपालकों और किसानों के लिए मवेशियों का दाना, हरा चारा और रखरखाव का खर्च काफी बढ़ चुका है। इसके अलावा, डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट्स का संचालन खर्च, दूध की पैकेजिंग सामग्री और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के कारण परिवहन (Transportation Cost) में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। किसानों को दूध का उचित खरीद मूल्य (Procurement Price) देने के लिए डेयरियों को यह कदम उठाना पड़ा।
आम जनता और छोटे कारोबारियों पर क्या होगा असर?
दूध एक ऐसी जरूरत है जो हर घर में सुबह चाय से लेकर बच्चों के नाश्ते तक इस्तेमाल होती है। एक सामान्य परिवार में अगर रोजाना 2 लीटर दूध की खपत है, तो इस 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से महीने का बजट लगभग ₹120 तक बढ़ जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, चाय की टपरी चलाने वाले, हलवाई, कैफे और बेकरी संचालकों पर इसका काफी बुरा असर पड़ेगा। दही, पनीर, मावा, मक्खन और मिठाइयों की लागत भी बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में बाजार में इन खाद्य पदार्थों के दाम भी महंगे हो सकते हैं।
