घर की कीमत पिछले 5 सालों में तेजी से बढ़ी है। इसके चलते EMI का बोझ बढ़ा है। इसका असर आम होम बायर्स पर हो रहा है। बहुत सारे लोग महंगे घर तो खरीद ले रहे हैं, लेकिन ईएमआई चुकाने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। बता दें कि होम लोन की EMI न चुकाने, पेमेंट में देरी करने या डिफॉल्ट करने से गंभीर कानूनी और फाइनेंशियल मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। नतीजतन, ऐसी स्थिति क्रेडिट प्रोफाइल खराब होता है। इससे बचने के लिए आपको घर खरीदने से पहले '3/20/30/40' का नियम जानना जरूरी है। अगर आप इस नियम को फॉलो करेंगे तो होम लोन की ईएमआई चुकाने में कभी भी परेशानी नहीं आएगी। आइए जानते हैं कि क्या है यह नियम और कैसे यह होम बायर्स को टेंशन फ्री रखने का काम करता है।
होम लोन
क्या है '3/20/30/40' का नियम?
| नियम | अर्थ | उद्देश्य |
|---|
| 3 | घर की कीमत आपकी वार्षिक आय के 3 गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए। | प्रॉपर्टी के लिए जरूरत से ज्यादा भुगतान करने से बचाता है। |
| 20 | होम लोन की अवधि 20 वर्ष या उससे कम होनी चाहिए। | कुल ब्याज लागत को कम करता है। |
| 30 | होम लोन की EMI आपकी मासिक सकल आय के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए। | नकदी प्रवाह (Cash Flow) को स्वस्थ बनाए रखता है। |
| 40 | प्रॉपर्टी की कीमत का कम से कम 40% हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए। | लोन का बोझ और ब्याज खर्च कम करता है। |
उदाहरण से इस नियम को समझते हैं-
मान लेते हैं कि राम की सालाना आय 10 लाख रुपये है तो उसे ₹30 लाख तक के घर का लक्ष्य रखना चाहिए। 40% डाउन पेमेंट (₹12 लाख) के साथ, उसे ₹18 लाख के लोन की जरूरत होगी। लगभग 7.5% ब्याज दर पर 20 साल के लोन की EMI लगभग ₹14,501 होगी, जो ₹10 लाख की सैलरी पर उसकी लगभग ₹83,000 की मासिक आय की 30% सीमा के भीतर आसानी से आ जाती है।
एक्सपर्ट का कहना है कि 3/20/30/40 नियम का पालन करने से होम बायर्स को कर्ज के बोझ से बचने, आर्थिक स्थिरता और स्पष्टता बनाए रखने और घर खरीदने के बारे में बेहतर फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
