Jaipur Rugs Success Story : बैंक की नौकरी छोड़ी, ₹5000 के उधार से शुरू किया काम; आज 60 देशों तक फैला कारोबार

जयपुर रग्स की कामयाबी उस दार्शनिक विचार की कामयाबी है, जो मानता है कि व्यापार में भी नैतिकता, मानवता और आत्मा की आवाज को जीवित रखा जा सकता है। जानिए कैसे नंद किशोर चौधरी खड़ी की ये कंपनी।

Jaipur Rugs Success Story : निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे किसी व्यक्ति को अगर बैंक की आरामदायक सुरक्षित नौकरी मिल जाए, तो पूरा परिवार धन्य हो जाता है। लेकिन, नंद किशोर चौधरी ने साल 1978 में सपनों के इस जीवन को ठुकराते हुए संघर्ष का रास्ता चुना और फिर कामयाबी की ऐसी कहानी लिखी, जिसे आज Harvard Business School से लेकर IIM तक केस स्टडी के तौर पर पढ़ाया जाता है।

Jaipur Rugs Success Story

हावर्ड में पढ़ाई जाती है कामयाबी की कहानी

नंद किशोर चौधरी चाहते, तो आराम से बैंक की नौकरी कर सकते थे। परिवार भी यही चाहता था कि बेटा सुरक्षित करियर चुने। लेकिन उन्होंने नौकरी के बजाय कारोबार का जोखिम उठाया। पिता से ₹5,000 उधार लिए, घर के आंगन में 2 करघे लगाए और 9 बुनकरों के साथ कालीन बनाने का काम शुरू किया। उस समय उन्होंने खुद भी नहीं सोचा होगा कि उनका यह छोटा कारोबार एक दिन दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित हस्तनिर्मित कालीन ब्रांडों में शामिल होगा।

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