टैक्स नहीं बनता फिर भी क्यों फाइल करना चाहिए ITR? वो फायदे जो आपके बहुत काम आएंगे

अगर आप भी सोचते हैं कि टैक्स स्लैब में तो आते नहीं टैक्स भर कर क्या करेंगे तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। आइए आपको बताते हैं टैक्सेबल न होने के बावजूद भी आपको क्यों ITR फाइल करना चाहिए?

भारत में बहुत से लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) सिर्फ उन्हीं लोगों को फाइल करना चाहिए जिनकी कमाई टैक्स स्लैब के दायरे में आती है या जिन्हें सरकार को टैक्स देना होता है। अगर आपकी सालाना आय 2.5 लाख या 7 लाख (नया टैक्स रिजीम) से कम है और आपका कोई टैक्स नहीं बनता, तो आप शायद सोचते होंगे कि भला आईटीआर भरने की झंझट में क्यों पड़ा जाए। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों और नियमों की मानें तो टैक्स न बनने के बावजूद आईटीआर फाइल करना आपके लिए बेहद फायदेमंद और कई मामलों में तो बहुत जरूरी साबित हो सकता है। आईटीआर सिर्फ टैक्स चुकाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आपके कई काम आ सकता है।

Income Tax

क्या है जीरो ITR फाइल करने के फायदे?

निल या जीरो आईटीआर (Nil ITR) फाइल करने का सबसे पहला और बड़ा फायदा तब मिलता है जब आप बैंक से किसी भी तरह के लोन (Loan) के लिए आवेदन करते हैं। चाहे आपको अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन लेना हो, नई गाड़ी के लिए कार लोन चाहिए हो या फिर बिजनेस को बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन की जरूरत हो बैंक सबसे पहले आपसे पिछले 2 से 3 सालों का आईटीआर मांगते हैं। बैंक इसे आपकी आय के सबसे भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रमाण (Proof of Income) के रूप में देखते हैं। भले ही आपका टैक्स न बनता हो, लेकिन लगातार भरा गया आईटीआर यह साबित करता है कि आपकी आय का एक नियमित स्रोत है और आप वित्तीय रूप से अनुशासित हैं। इससे बैंकों का आप पर भरोसा बढ़ता है और आपका लोन आसानी से और कम ब्याज दरों पर मंजूर हो जाता है।

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