IT Stock Crash : भारतीय शेयर बाजार के IT सेक्टर में आज का शुक्रवार 19 जून को ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ है। ग्लोबल IT दिग्गज एक्सेंचर (Accenture) ने पश्चिम एशिया में हुए तनाव का हवाला देते हुए अपने सालाना रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती की है। इसके बाद घरेलू बाजार में आईटी शेयरों में सुनामी आ गई है।
क्यों आई आईटी स्टॉक्स में गिरावट
शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही निफ्टी आईटी (Nifty IT) इंडेक्स करीब 6% तक टूट गया, जिससे यह बाजार का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया। इस चौतरफा बिकवाली (Sell-off) के कारण शुरुआती कारोबार में ही आईटी कंपनियों के निवेशकों के ₹1.35 लाख करोड़ से ₹2 लाख करोड़ रुपये मिनटों में हवा हो गए।
क्रैश का लाइव रिपोर्ट कार्ड
दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही दिग्गज टेक कंपनियों के शेयरों को कौड़ियों के दाम बेचा जा रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचने में आईटी शेयरों का ही सबसे बड़ा हाथ रहा।
| कंपनी/इंडेक्स | आज की गिरावट (%) | मौजूदा स्थिति और बड़ा अपडेट |
| Nifty IT Index | ~ 6.0% down | साल 2026 (CY26) में यह इंडेक्स अब तक 29% टूट चुका है। |
| Infosys (इन्फोसिस) | 7.6% से 8.0% down | निफ्टी 50 का सबसे बड़ा लूजर; अमेरिकी बाजार में इसका ADR 9.7% क्रैश हुआ। |
| Tech Mahindra | 6.3% down | भारी बिकवाली के दबाव में। |
| TCS (टाटा कंसल्टेंसी) | 6.0% down | दिग्गज शेयर में बड़ी गिरावट, सपोर्ट लेवल टूटा। |
| HCLTech | 5.3% down | लागत कटौती (Cost Optimisation) के बावजूद शेयर फिसला। |
| Wipro (विप्रो) | 3.6% से 4.0% down | अमेरिकी बाजार में विप्रो का ADR भी 3.6% टूटा। |
क्यों आया यह भूचाल?
भारतीय आईटी कंपनियों की सेहत का सीधा कनेक्शन अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों से होता है। कल रात अमेरिकी शेयर बाजार (NYSE) में Accenture का शेयर 18% से 19% तक टूटकर इतिहास के सबसे निचले स्तरों पर आ गया। इसी का संक्रामक असर (Contagion Effect) आज भारतीय टेक कंपनियों पर दिखा है।
एक्सेंचर की रिपोर्ट में क्या खतरनाक?
गाइडेंस में बड़ी कटौती: एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने सालाना स्थानीय मुद्रा रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान (Guidance) के ऊपरी स्तर को 100 बेसिस पॉइंट घटाकर 3% से 4% कर दिया है। पहले यह 3% से 5% के बीच में था। कंपनी की नई बुकिंग और ऑर्डर्स में सालाना आधार पर 14.7% की बड़ी गिरावट आई है, जो दिखाता है कि वैश्विक कंपनियां अब तकनीक पर नया पैसा खर्च करने से बच रही हैं। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि पश्चिम एशिया के व्यवधानों और अमेरिकी फेडरल बिजनेस में धीमी खरीद प्रक्रियाओं के कारण उनके रेवेन्यू पर भारी दबाव है।
ब्रोकरेज के रुख ने जताई चिंता
ग्लोबल ब्रोकरेज दिग्गज Jefferies ने IT सेक्टर के लिए 'अंडरवेट' रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का मानना है कि एक्सेंचर के खराब नतीजों के बाद भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई के अनुमानों में भी कटौती हो सकती है। वहीं, CLSA ने इन्फोसिस और विप्रो के मुकाबले HCLTech को तरजीह दी है, क्योंकि एचसीएल टेक के पास कॉस्ट-ऑप्टिमाइजेशन की गुंजाइश है और प्रोजेक्ट्स का मजबूत पोर्टफोलियो है।
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