फेस्टिव सीजन (Festive Season) में घरों में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, फर्नीचर, कार और दूसरे महंगे सामान की खरीदारी बढ़ जाती है। कंपनियां और बैंक भी इस दौरान नो-कॉस्ट EMI, कम ब्याज दर और आसान लोन जैसे ऑफर देते हैं। ऐसे में कई लोग अपनी पसंद की चीज खरीदने के लिए लोन (Loan) या ईएमआई (EMI) का सहारा लेते हैं। हालांकि, लोन लेकर शॉपिंग करना हमेशा गलत नहीं है, लेकिन बिना हिसाब लगाए लिया गया कर्ज आगे चलकर बजट बिगाड़ सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले 5 बातों का ध्यान रख सकते हैं-
लोन लेकर कर रहे फेस्टिव शॉपिंग, इन बातों को न करें नजरअंदाज (AI Generated Image)
जरूरत और इच्छा के बीच फर्क समझें
सबसे पहले यह तय करें कि जिस सामान के लिए लोन लिया जा रहा है, वह वास्तव में जरूरी है या सिर्फ फेस्टिव ऑफर देखकर खरीदने का मन बना है। अगर सामान की जरूरत नहीं है तो सिर्फ डिस्काउंट या कैशबैक के कारण कर्ज लेना समझदारी नहीं है। खासकर महंगे गैजेट और फर्नीचर जैसी चीजों की खरीदारी में जल्दबाजी से बचें।
मंथली सैलरी से लगाएं खर्च का हिसाब
लोन लेने से पहले देखें कि हर महीने कितनी EMI आसानी से चुका सकते हैं। पहले से चल रही होम लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI को भी इसमें शामिल करें। कोशिश करें कि नई EMI जोड़ने के बाद आपकी मासिक आय का बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में न चला जाए। ऐसा होता है तो रोजमर्रा के खर्च और बचत प्रभावित हो सकती है।
केवल ईएमआई देखकर न लें फैसला
लोन लेते समय सिर्फ EMI की रकम देखकर फैसला न करें। ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, GST, लेट पेमेंट चार्ज और अन्य शुल्क की जानकारी लें। कई बार कम EMI का मतलब लंबी अवधि और ज्यादा कुल भुगतान हो सकता है। इसलिए यह जरूर देखें कि सामान की कीमत के मुकाबले लोन पूरा होने तक कुल कितनी रकम चुकानी पड़ेगी।
नो-कॉस्ट EMI की शर्तें न करें नजरअंदाज
फेस्टिव सीजन में नो-कॉस्ट EMI के ऑफर आम हैं, लेकिन इन्हें लेने से पहले नियम और शर्तें पढ़ना जरूरी है। कुछ मामलों में प्रोसेसिंग फीस या दूसरे शुल्क लग सकते हैं। कैशबैक, डिस्काउंट और बैंक ऑफर की वास्तविक बचत भी जांचें। सिर्फ ‘नो-कॉस्ट’ लिखा देखकर तुरंत खरीदारी न करें।
इमरजेंसी फंड का न करें इस्तेमाल
फेस्टिव शॉपिंग के लिए अपना इमरजेंसी फंड खत्म कर या भविष्य की जरूरी बचत रोककर EMI लेना सही फैसला नहीं है। नौकरी, स्वास्थ्य या किसी अचानक आने वाले खर्च की स्थिति में यही बचत काम आती है। अगर EMI चुकाने के बाद हर महीने बचत के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बच रहा है तो खरीदारी टालना बेहतर है।
