कहीं 5 लीटर तो कहीं 2 लीटर तेल के लिए लगी कतारें, इन देशों रोज इतना ही मिल रहा पेट्रोल डीजल

पेट्रोल डीजल की कमी का असर इस कदर नजर आ रहा है कि कई देशों में पेट्रोल डीजल एक लिमिट में ही दिया जा रहा है। यानी आप अपनी मर्जी से टंकी नहीं फुल करा सकते हैं, आइए आपको बताते हैं क्यों हो रहा है ऐसा?

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर अब आम आदमी की गाड़ी की टंकी तक पहुंचने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर हैं। कुछ गरीब और आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों में तेल का स्टॉक इतना कम बचा है कि वहां की सरकारों ने 'फ्यूल राशनिंग' (Fuel Rationing) का रास्ता अपनाया है। इसका मतलब है कि अब लोग अपनी मर्जी से टंकी फुल नहीं करा सकते, बल्कि सरकार द्वारा तय की गई सीमित मात्रा में ही उन्हें ईंधन मिल रहा है।

Petrol Diesel

क्या होती है फ्यूल राशनिंग (Fuel Rationing)?

आसान भाषा में समझें तो यह 'ईंधन का राशन कार्ड' जैसा सिस्टम है। जब किसी देश में तेल की भारी कमी हो जाती है, तो सरकार एक 'कोटा सिस्टम' लागू करती है। इसके तहत दोपहिया वाहनों, कारों और कमर्शियल वाहनों के लिए प्रतिदिन या प्रति सप्ताह की एक सीमा तय कर दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, कुछ देशों में कारों के लिए दिन में केवल 5 लीटर और दोपहिया वाहनों के लिए 2 लीटर पेट्रोल की सीमा तय की गई है। यह कदम इसलिए उठाया जाता है ताकि देश की आवश्यक सेवाएं जैसे एम्बुलेंस, दमकल और पुलिस की गाड़ियां न रुकें।

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