Iran Oil Offer to India। US Iran Sanctions Waiver : पीस डील के बाद अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों में राहत दी है। अमेरिका ने ईरान को क्रूड व्यापार पर 21 अगस्त तक प्रतिबंधों से छूट दी है। ईरान इस स्थिति का जल्द से जल्द फायदा उठाना चाहता है। इसके लिए ईरान ने भारत की तेल कंपनियों से संपर्क किया है।
ईरान ने भारत को दिया क्रूड ऑयल का ऑफर
भारत के लिए रूस के बाद ईरान सस्ते क्रूड का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर भारत प्रतिबंधों से पहले की तरह करीब 27 मिलियन टन ईरानी क्रूड खरीदता है। वहीं, ईरान पहले की तरह ब्रेंट की तुलना में भारत को 5-10 डॉलर प्रति बैरल की छूट देता है, तो सालाना तेल आयात बिल ₹8,500 करोड़ से ₹17,000 करोड़ तक घट सकता है।
ईरान हमेशा से भारतीय क्रूड बास्केट में अहम हिस्सेदारी रखता आया है। हालांकि, 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद से भारत ने ईरान से क्रूड आयात रोक दिया था। लेकिन, अब बदली हुई परिस्थितियों में भारत और ईरान के बीच फिर से क्रूड का व्यापार शुरू हो सकता है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुताबिक ईरान की सरकारी तेल कंपनी नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क साधकर अपने कच्चे तेल की आपूर्ति फिर से शुरू करने की पेशकश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ते और भरोसेमंद स्रोतों की तलाश में है। पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के लिए सबसे बड़ा रियायती तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, लेकिन अब ईरान की संभावित वापसी से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम ईरान का प्रस्ताव?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और वह लंबे समय तक भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। प्रतिबंधों से पहले भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल को बड़े पैमाने पर खरीदती थीं, क्योंकि इसकी गुणवत्ता भारतीय रिफाइनिंग सिस्टम के अनुकूल है। रिपोर्ट में रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ईरान भारतीय कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कीमतों में छूट, शिपिंग सुविधाएं और आसान भुगतान शर्तों की पेशकश कर सकता है। यही वजह है कि भारतीय कंपनियां इस प्रस्ताव का तकनीकी और व्यावसायिक मूल्यांकन कर रही हैं।
क्यों चीन की जगह भारत पर ईरान का जोर
चीन फिलहाल ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। लेकिन, अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधों में मिली छूट के बाद ईरान चीन के साथ ही भारत को अपने ग्राहकों में शामिल करना चाहता है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच आगे चलकर रिश्ते सुधरते हैं, तो ईरान के लिए चीन की जगह भारत को तेल बेचना ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इसके अलावा चीन की क्रूड की खपत स्थिर है, जबकि भारत की खपत बढ़ रही है। ईरान को चीन के साथ ही भारत का बाजार भी मिलता है, तो उसे तेजी से अपना क्रूड बेचने का अवसर मिलेगा।
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