Iran Crisis: अब भारत की शरण में अमेरिका! इस काम के लिए ट्रंप प्रशासन ने सरकार से मांगी मदद

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि वहां तेल को उतारने के लिए छह सप्ताह तक इंतजार कराने के बजाय, इसे पहले ही भारत खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में भेजे ताकि तेल की कमी की आशंका, कीमतों में अचानक बढ़ोतरी और बाजार में व्याप्त चिंताओं को कम किया जा सके।

Crude Oil Price Diplomacy: ईरान युद्ध के बीच सुपरपावर अमेरिका बैकफुट पर आ गया है। दरअसल कच्चे तेल की कीमत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी को देखते हुए अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया है कि वह समुद्री परिवहन में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल को खरीदकर उसे भारतीय रिफाइनरियों की ओर मोड़ दे, ताकि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच आपूर्ति में संभावित कमी और कीमतों में उछाल की आशंकाओं को कम किया जा सके। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि यह कदम बाजार को स्थिर रखने के लिए एक अल्पकालिक और व्यावहारिक प्रयास है।

Iran Crisis (Photo Credit: AI)

ट्रंप प्रशासन ने मांगी मदद

भारतीय अधिकारियों से बात की

उन्होंने रविवार को 'सीएनएन’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ मिलकर भारतीय अधिकारियों से बात की थी ताकि चीनी रिफाइनरियों में उतारे जाने की प्रतीक्षा कर रहे रूसी कच्चे तेल के कार्गो को भारत खरीद सके। राइट ने कहा कि भारत इस मामले में एक अच्छा सहयोगी रहा है। मैंने और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारतीय अधिकारियों से फोन पर बात की और कहा कि अभी बहुत सारा तेल चीन की रिफाइनरियों में उतारा जाना है। उन्होंने कहा कि वहां तेल को उतारने के लिए छह सप्ताह तक इंतजार कराने के बजाय, इसे पहले ही भारत खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में भेजे ताकि तेल की कमी की आशंका, कीमतों में अचानक बढ़ोतरी और बाजार में व्याप्त चिंताओं को कम किया जा सके।

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