Gold-Silver Import : देश में मई महीने के दौरान सोने के आयात (gold import) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पिछले साल इसी महीने की तुलना में यह वृद्धि काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश और आभूषण उद्योग की मजबूत मांग के कारण सोने का आयात बढ़ा है। भारत में सोना न केवल निवेश का प्रमुख माध्यम है, बल्कि शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान इसकी मांग भी काफी बढ़ जाती है।
मई में सोने का आयात 34 प्रतिशत बढ़ा, चांदी का आयात 86 प्रतिशत घटा (तस्वीर-istock)
चांदी के आयात में 86 फीसदी से ज्यादा गिरावट
जहां एक ओर सोने का आयात (silver import) बढ़ा, वहीं चांदी के आयात में भारी गिरावट देखने को मिली। मई में चांदी का आयात 86.65 प्रतिशत घटकर केवल 7.55 करोड़ डॉलर रह गया। पिछले वर्ष मई में यह आंकड़ा 56.62 करोड़ डॉलर था। इस बड़ी गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार में चांदी की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही है या फिर ऊंची कीमतों और अन्य आर्थिक कारणों से आयातकों ने खरीद कम की है।
आयात शुल्क बढ़ाने का सरकार का फैसला
सरकार ने हाल ही में कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। 13 मई से लागू इस फैसले के तहत सोना और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य आयात को नियंत्रित करना और व्यापार घाटे पर दबाव कम करना है। हालांकि, शुल्क बढ़ने के बावजूद सोने के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो घरेलू बाजार में इसकी मजबूत मांग को दर्शाती है।
व्यापार घाटे पर पड़ा असर
सोने के आयात में वृद्धि का असर देश के व्यापार घाटे पर भी दिखाई दिया है। मई महीने में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 28.21 अरब डॉलर पहुंच गया। व्यापार घाटा तब बढ़ता है जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक हो जाता है। सोने जैसी कीमती धातुओं का अधिक आयात विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है और व्यापार संतुलन को प्रभावित करता है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं सोना-चांदी की कीमतें
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वर्तमान में सोना सभी करों समेत करीब 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी की कीमत करीब 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद निवेशकों और उपभोक्ताओं की रुचि सोने में बनी हुई है।
स्विट्जरलैंड बना सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
भारत के लिए स्विट्जरलैंड सोने का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। कुल सोना आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण अफ्रीका की करीब 10 प्रतिशत है। हालांकि, मई महीने में स्विट्जरलैंड से होने वाले सोने के आयात में 57.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में भी इस देश से आयात 20.34 प्रतिशत कम रहा।
कुल आयात में कीमती धातुओं की बड़ी हिस्सेदारी
सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं का भारत के कुल आयात में महत्वपूर्ण योगदान है। आंकड़ों के अनुसार, इन धातुओं की हिस्सेदारी देश के कुल आयात का 5 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए इनके आयात में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करता है।
अप्रैल-मई में भी मजबूत रही सोने की मांग
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों यानी अप्रैल और मई के दौरान सोने का आयात 60.14 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके विपरीत, इसी अवधि में चांदी के आयात में करीब 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों और उपभोक्ताओं का झुकाव अभी भी सोने की ओर अधिक बना हुआ है।
पिछले वित्त वर्ष में बना था नया रिकॉर्ड
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात 24 प्रतिशत बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। यह अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। हालांकि, मात्रा के आधार पर देखें तो सोने का आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। इसका मतलब है कि ऊंची कीमतों के कारण कम मात्रा में सोना आयात होने के बावजूद कुल आयात मूल्य बढ़ गया।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता भारत
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में आभूषण, निवेश और सांस्कृतिक परंपराओं के कारण सोने की मांग हमेशा मजबूत रहती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और आयात शुल्क में बदलाव के बावजूद भारत में सोने का आयात लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। आने वाले महीनों में त्योहारों और शादी के सीजन के कारण सोने की मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
