Forex Reserves : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने शुक्रवार को बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में मजबूत स्थिति में है। 29 मई 2026 तक यह भंडार 682.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो भारत के लिए करीब 11 महीनों के आयात को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि यह स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से भी संतोषजनक माना जाता है, खासकर जब विदेशी ऋण के मुकाबले भंडार की पर्याप्तता 89.1 प्रतिशत के करीब है।
विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत (तस्वीर-istock)
आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में भंडार
गवर्नर ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह बाहरी झटकों, जैसे वैश्विक आर्थिक संकट या अचानक मुद्रा उतार-चढ़ाव, से देश को बचाने में मदद करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई के पास कई तरह के नियामकीय और बाजार आधारित उपाय मौजूद हैं, जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर रखने के लिए किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक किसी भी अस्थिर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नीतिगत कदमों से भुगतान संतुलन मजबूत करने की कोशिश
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि सरकार और केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए जा रहे कई नीतिगत कदम देश के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं। इनमें प्रमुख व्यापार साझेदारों के साथ हाल ही में हुए समझौते, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति, और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम जैसे कदम शामिल हैं। इसके अलावा ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देने, सीमावर्ती क्षेत्रों में एफडीआई नियमों को आसान बनाने और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के नियमों में ढील देने जैसे सुधार भी इसमें शामिल हैं।
बाहरी आर्थिक दबाव और वैश्विक अनिश्चितताएं
गवर्नर ने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारत ने ऊंचे शुल्क (टैरिफ) और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं 2026-27 में चालू खाते के घाटे (करंट अकाउंट डेफिसिट) को बढ़ा सकती हैं। यह स्थिति अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है।
आयात, लोन और भंडार में उतार-चढ़ाव
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया है। 22 मई को समाप्त सप्ताह में यह भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया था। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह अपने अब तक के उच्चतम स्तर 728.49 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के कारण कई सप्ताह तक इसमें गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान रुपये पर दबाव बढ़ा, जिससे आरबीआई को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।
भविष्य की संभावनाएं और आर्थिक संतुलन
गवर्नर ने भरोसा जताया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर टिकी हुई है। सेवा क्षेत्र के व्यापार में अधिशेष और विदेशों से आने वाले धन प्रेषण (रेमिटेंस) देश को बाहरी दबावों से राहत देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आरबीआई का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी बनाए रखना है, ताकि आर्थिक गतिविधियों और मौद्रिक नीति के प्रभावी प्रसारण में कोई बाधा न आए। आरबीआई का मानना है कि मौजूदा नीतिगत कदम और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
