भारत में सड़क यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब टोल प्लाजा पर लंबी लाइनों में लगने और गाड़ियों के रुकने की झंझट खत्म होने जा रही है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने गुजरात के सूरत में देश का पहला बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। यह नई तकनीक न केवल समय बचाएगी बल्कि हाईवे पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगी।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
सूरत में शुरू किया गया यह टोल सिस्टम अत्याधुनिक सेंसर और कैमरों पर आधारित है। जब भी कोई वाहन इस टोल क्षेत्र से गुजरता है, तो वहां लगे हाई-स्पीड कैमरे और आरएफआईडी (RFID) रीडर वाहन के फास्टैग (FASTag) को तुरंत स्कैन कर लेते हैं। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन को अपनी गति कम करने या रुकने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती। जैसे ही वाहन गुजरता है, उसके खाते से टोल की राशि अपने आप कट जाती है और चालक के मोबाइल पर उसका मैसेज आ जाता है।
'नो ब्रेकिंग, नो वेटिंग' का अनुभव
अब तक टोल प्लाजा पर फास्टैग होने के बावजूद वाहनों को बैरियर के सामने रुकना पड़ता था, जिससे पीक आवर्स के दौरान लंबी कतारें लग जाती थीं। सूरत का यह नया सिस्टम 'नो ब्रेकिंग, नो वेटिंग' के सिद्धांत पर काम करता है। इससे न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि वाहनों के बार-बार रुकने और चलने से होने वाले प्रदूषण और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। यह तकनीक यात्रियों को बिना किसी रुकावट के एक स्मूथ ड्राइविंग अनुभव प्रदान करती है।
सूरत में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, सरकार की योजना इसे देश के अन्य प्रमुख राजमार्गों और व्यस्त टोल प्लाजा पर भी लागू करने की है। यह सिस्टम ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित टोलिंग की ओर बढ़ने का एक शुरुआती चरण है। इस तकनीकी प्रगति से देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दक्षता बढ़ेगी और माल ढुलाई वाले वाहनों का समय बचेगा, जिसका सीधा सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
